Ghaziabad Air Pollution Today: नए साल की शुरुआत गाजियाबाद के लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि मुश्किलें लेकर आई है. एक ओर घना कोहरा और कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को जकड़ रखा है, तो दूसरी ओर प्रदूषण ने शहर की हवा को फिर से जहरीला बना दिया है. तेज हवाओं के कारण कुछ इलाकों में AQI में मामूली सुधार जरूर दिखा, लेकिन कुल मिलाकर गाजियाबाद की हवा अब भी सेहत के लिए खतरनाक बनी हुई है. वहीं घना कोहरा और गिरता तापमान लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है.
मौसम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ताजा आंकड़े बताते हैं कि आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है. इस दिन अधिकतम तापमान करीब 17 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है.
3 और 4 जनवरी का मौसम कैसा रहेगा?
हालांकि, 3 जनवरी को भी हालात बहुत ज्यादा नहीं बदलेंगे और सुबह के वक्त घना कोहरा छाए रहने की संभावना है. तापमान 17 डिग्री अधिकतम और 7 डिग्री न्यूनतम रह सकता है. वहीं 4 जनवरी को कोहरे की तीव्रता कुछ कम होकर मध्यम कोहरा रहने का अनुमान है, अधिकतम तापमान 18 डिग्री और न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा. मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान में और गिरावट हो सकती है, जिससे ठंड का असर और तेज होगा।
गाजियाबाद में AQI की स्थिति, कहां राहत और कहां खतरा
तेज हवाओं के कारण गाजियाबाद के कुछ इलाकों में वायु गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन कई क्षेत्र अब भी रेड जोन में बने हुए हैं. गाजियाबाद के प्रमुख इलाकों का AQI
इंदिरापुरम: 227 (ऑरेंज जोन)
लोनी: 295 (ऑरेंज जोन के करीब)
संजय नगर: 295 (ऑरेंज जोन के करीब)
वसुंधरा: 384 (रेड जोन)
विशेषज्ञों के अनुसार यह सुधार अस्थायी है और मौसम में बदलाव के साथ प्रदूषण दोबारा बढ़ सकता है.
नववर्ष पर चार साल में सबसे जहरीली रही गाजियाबाद की हवा
नए साल के जश्न के बीच गाजियाबाद की हवा लोगों की सांसों पर भारी पड़ती रही. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, नववर्ष के दिन गाजियाबाद का AQI 356 दर्ज किया गया, जिससे यह दिल्ली और नोएडा के बाद तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा. पिछले वर्षों की तुलना करें तो
2021: AQI 470 (गंभीर)
2023: AQI 209 (खराब, सबसे कम)
2024/2025 नववर्ष: AQI 356 (बहुत खराब)
करोड़ों खर्च, फिर भी साफ हवा नहीं
गाजियाबाद में हर साल प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं. नगर निकाय सड़कों पर पानी के छिड़काव, मशीनों से धूल हटाने, टूटी सड़कों के मेंटेनेंस जैसे कार्यों का दावा करते हैं. इन कार्यों की निगरानी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करता है. इसके बावजूद, साल के पहले दिन से आखिरी दिन तक गाजियाबाद की हवा ज्यादातर समय जहरीली बनी रहती है. सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच साफ हवा की उम्मीद हर साल अधूरी रह जाती है.










