Farming Tips: अगेती गेहूं की दूसरी सिंचाई के समय जरूर बरतें ये सावधानियां, दाना बनेगा मोटा, पैदावार होगी अच्छी

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अगेती गेहूं की दूसरी सिंचाई के समय बरतें ये सावधानियां, पैदावार होगी अच्छी

Last Updated:January 01, 2026, 16:12 IST

Genhu Ki Kheti: गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए दूसरी सिंचाई बेहद अहम होती है. एक्सपर्ट के अनुसार, इस समय हल्की सिंचाई और जलभराव से बचाव जरूरी है. सही समय पर पानी देने, सिंचाई करने और यूरिया के इस्तेमाल से गेहूं की फसल हरी-भरी रहती है और उत्पादन बढ़ता है. आइए जानते हैं गेहूं में कब और कितनी सिंचाई और यूरिया का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

Wheat Farming Tips: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले को गेहूं उत्पादन के बड़े क्षेत्रों में गिना जाता है. यहां किसान मेहनत और समय पर सिंचाई करके अच्छी पैदावार की उम्मीद रखते हैं, लेकिन कई बार छोटी सी लापरवाही पूरी फसल को नुकसान पहुंचा देती है. खासतौर पर दूसरी सिंचाई के समय अगर सही तरीका न अपनाया जाए, तो गेहूं की फसल पीली पड़ने लगती है और उत्पादन घटने का खतरा बढ़ जाता है.
कृषि वैज्ञानिक डॉ प्रदीप बिसेन का कहना है कि जिन किसानों ने नवंबर महीने में गेहूं की अगेती किस्म की बुवाई की थी, उनके लिए अब दूसरी सिंचाई का सही समय आ चुका है. इस दौरान हल्की और संतुलित सिंचाई करना बेहद जरूरी है, ताकि फसल स्वस्थ बनी रहे और अच्छी उपज मिल सके.

दूसरी सिंचाई में क्यों जरूरी है सावधानी
डॉ प्रदीप बिसेन बताते हैं कि दूसरी सिंचाई के समय खेत में जलभराव बिल्कुल नहीं होना चाहिए. अगर खेत में पानी रुक गया, तो गेहूं की जड़ों पर बुरा असर पड़ता है. इससे पौधों की पकड़ कमजोर हो जाती है और हल्की हवा चलने पर भी फसल गिर सकती है. ऐसी स्थिति में पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है.
इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि सिंचाई इतनी ही करें, जिससे मिट्टी सिर्फ गीली हो. खेत में पानी जमा न होने पाए. ज्यादा पानी देने से फायदा नहीं, बल्कि नुकसान होता है.
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गेहूं की सिंचाई का सही समय क्या है
गेहूं की दूसरी सिंचाई करते समय समय का चुनाव भी बहुत अहम होता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, शाम के समय हल्की सिंचाई करना ज्यादा फायदेमंद रहता है. शाम के वक्त हवा की गति कम होती है, जिससे पानी धीरे-धीरे जमीन में समा जाता है. सुबह तक खेत सूखा रहता है और फसल हरी-भरी नजर आने लगती है.

एक्सपर्ट की सलाह क्या कहती है
कृषि वैज्ञानिक डॉ प्रदीप बिसेन के मुताबिक, गेहूं की दूसरी सिंचाई बुवाई के लगभग 40 से 45 दिन के बीच करनी चाहिए. इस दौरान खेत की मेढ़ और समतल जमीन पर खास नजर रखें, ताकि कहीं भी पानी इकट्ठा न हो. जलभराव से पौधों की बढ़वार रुक जाती है और दाना कमजोर रह जाता है.

सिंचाई के चार दिन बाद क्या करें किसान
डॉ बिसेन बताते हैं कि दूसरी सिंचाई के करीब चार दिन बाद गेहूं की फसल में यूरिया का प्रयोग करना लाभकारी होता है. इससे पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है और पत्तियां हरी रहती हैं. अगर खेत में गेहूं की फसल पीली दिखाई दे रही है, तो मैन्कोज़ेब दवा का छिड़काव किया जा सकता है. इससे रोगों पर नियंत्रण मिलता है और फसल फिर से स्वस्थ होने लगती है.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

Location :

Lakhimpur,Kheri,Uttar Pradesh

First Published :

January 01, 2026, 16:12 IST

Source

dainikupeditor@gmail.com

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