Last Updated:May 08, 2026, 13:31 IST
Bahraich News: बहराइच जिले के राजा बौडी क्षेत्र के छोटे से गांव में रहने वाले अनंत राम पांडे घर में आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई के दौरान मिलने वाली रविवार की छुट्टी को चना बेचने का काम करने लगे. बाद में कुछ ऐसा हुआ कि उनकी पढ़ाई छूट गई और अब चना बेचकर ही वह घर-परिवार चला रहे हैं. आइए संघर्ष से भरी अनंत राम पांडेय की पूरी कहानी आपको बताते हैं.
बहराइच: जिले के राजा बौडी क्षेत्र के छोटे से गांव में रहने वाले अनंत राम पांडेय घर में आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई के दौरान मिलने वाली रविवार की छुट्टी को चना बेचने का काम करने लगे. बाद में हुआ कुछ ऐसा कि छूट गई पढ़ाई और अब चना बेचकर घर परिवार चलता है, आइए संघर्ष भरी अनंत राम पांडेय की पूरी कहानी आपको बताते हैं.
अनंत राम ने लोकल 18 टीम से बातचीत में बताया कि यह चना बेचने का काम वह साल 2003 से कर रहे हैं. घर की आर्थिक स्थिति इतनी ठीक नहीं थी कि सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई किया जाए. घर परिवार का सहयोग करने के लिए संडे के दिन चना बेचने का काम अनंत राम ने शुरू किया. इसी दौरान मां बीमार हुई और पढ़ाई भी छूट गई. तब अनंत राम ने अपना पूरा समय पढ़ाई को छोड़ चना बेचने में ही लगा दिया.
न खेतपात और न कमाने का कोई और जरिया
अनंतनाग पांडे ने बताया कि घर परिवार की आर्थिक तंगी को लेकर हमेशा परेशान रहा है. कुछ जमीन थी, वह मां के देहांत और फिर उसके बाद भाई की बीमारी के कारण बिक गई, लेकिन भाई भी नहीं बचे. फिर शादी हुई और खर्च बढ़ गए, तब अनंत राम ने अपना गांव वाला घर छोड़ शहर में किराए का घर लिया और साइकिल से चना बेचने का व्यापार शुरू किया.
हर रोज 40 किलोमीटर तक चलती है साइकिल
बातचीत में अनंत राम ने यह भी बताया कि गांव में चने की इतनी बिक्री नहीं होती थी, ऊपर से घर-रिवार का खर्चा और बच्चों की पढ़ाई. अनंत राम ने कहा कि शहर आकर किराए पर मकान लेकर और फिर साइकिल पर इन्होंने चना बेचने का पूरा सेटअप तैयार किया. अब हर रोज अनंत राम की साइकिल शहरभर में घूम-घूम कर चना बेचने का काम करती है, जिसकी शुरुआत डीएम तिराहे के पास से होती है और ऐसे बेचते-बेचते लखनऊ रोड मरौचा तक जाते हैं. इसमें 30 से 40 किलोमीटर साइकिल प्रतिदिन आराम से चल जाती है, तब जाकर बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्चा निकल पाता है. अनंत राम ने बताया कि जीवन में बहुत सारी कठिनाइयां आई और बहुत सारा दु:ख झेला, लेकिन मेहनत नहीं छोड़ी और आज बच्चों को चने के कमाए हुए पैसे से ही पढ़ाई-लिखाई हो पा रही है और घर परिवार चला रहे हैं.
आखिर कैसा होता है अनंत राम का चना
अनंत राम ने अपनी साइकिल पर पीछे एक टोकरी लगा रखी है, जिसमें इन्होंने पार्टीशन कर रखा है. एक खाने में चना, एक खाने में मटर, एक में नमकीन और एक में दोना पत्तल रखते हैं. फिर घूम-घूम कर इसको बेचने का काम करते हैं. यह बहराइच जिले के थाना राजा बौडी के ग्राम साई गांव के रहने वाले हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
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