क्रिकेटर धोनी की तरह आप भी कर सकते हो मटर की खेती, होगी लाखों में कमाई
Last Updated:November 27, 2020, 07:26 IST
सितंबर महीने में मटर (Pea Farming) की बुआई शुरू हो जाती है. नवंबर के दूसरे सप्ताह में मटर की फसल आ जाती है. दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में मटर की शुरुआती कीमत 60 से लेकर 80 रुपये किलो तक होती है.
दरअसल G10 प्रजाति के इस पौधे मे करीब डेढ़ किलो तक मटर की टूट होती है और इसके दाने खाने में भी काफी मीठे होते हैं. हर मटर में 10 से 12 तक दाने होते हैं. दो एकड़ में की गयी मटर की खेती की पहली तोड़ाई में 100 से 125 किलो पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है.
नई दिल्ली. देश में इस समय मटर की खेती (Pea Farming) को लेकर खूब चर्चा हो रही है. इसका कारण भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) का मटर की खेती के प्रति प्रेम है. क्रिकेट के मैदान में कैप्टन कूल के नाम से मशहूर धोनी को सब्जियों में सबसे ज्यादा मटर खाना पसंद है. धोनी की इच्छा है कि जब पौधों में मटर निकलना शुरू हो जाए, तब वे सुकून के साथ अपने फार्म हाउस में मटर को छीलकर खाएं. इसके लिए धोनी ने बाकायदा रांची के अपने फार्म हाउस में बड़े पैमाने पर मटर की खेती शुरू कर दी है. बता दें कि देश के कई हिस्सों में मटर की खेती होती है और मटर की कई किस्म भी उगाए जाते हैं. आइए जानते हैं मटर की खेती देश के किन-किन राज्यों में होती है और यह क्यों फायदे का सौदा बनता जा रहा है.
मटर की खेती की क्या है अहमियत
भारत में सितंबर महीने में मटर की बुआई शुरू हो जाती है और नवंबर के दूसरे सप्ताह में मटर की फसल आ जाती है. दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में मटर की शुरुआती कीमत 60 से लेकर 80 रुपये किलो तक होती है. हाल के वर्षों में मटर की खेती कई किसानों की जिंदगी को बदल कर रख दिया है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और झारखंड जैसे राज्यों में मटर की खेती बड़े पैमाने पर शुरू हो गई है.
धोनी ने बाकायदा रांची के अपने फार्म हाउस में बड़े पैमाने पर मटर की खेती शुरू कर दी है.
मटर की फसल में नुकसान कितना
मटर की खेती की करने वाले किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान फसल में लगने वाले रोग और कीट से होता है. इसी को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने मटर की कई किस्में विकसित किया है, जो रोग प्रतिरोधी होने के साथ-साथ सस्ती भी है. वैज्ञानिकों ने मटर की नई किस्म पंत मटर-399 विकसित की है, जो मटर की अन्य किस्में एचएफपी-530 और पंत मटर-74 से विकसित किया गया है. पंत मटर-399 की खासियत है कि ये फफूंदी, रतुआ, रस्ट, चूर्णील जैसे बीमारियों की प्रतिरोधी है.
ये राज्य सबसे ज्यादा मटर पैदावार करता है
भारत में तकरीबन 5,415 हजार टन मटर का उत्पादन होता है. मटर की खेती करने वाले देश के प्रमुख राज्यों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, झारखंड, और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं. खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मटर की खेती खूब होती है. उत्तर प्रदेश में ही तकरीबन देश का आधा मटर का उत्पादन होता है.
किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान फसल में लगने वाले रोग और कीट से होता है.
चब्बेवाल मटर क्यों है फेमस
पंजाब के होशियारपुर का चब्बेवाल मटर देश में काफी चर्चित है. पूरे देश में मटर की फसल सबसे पहले यहीं तैयार होती है. मीठे स्वाद के कारण देश के तमाम राज्यों में चब्बेवाल के मटर की मांग खूब है. दिल्ली-एनसीआर में ज्यादातर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा के मटर मिलते हैं. कुछ साल पहले तक आर्थिक तंगी से जूझने वाले यहां के हजारों किसान परिवारों के जीवन में मटर ने समृद्धि ला दी है. इस इलाके के 100 गांवों में इस समय मटर की खेती हो रही है और हजारों किसान मटर की खेती से आत्मनिर्भर हो चुके हैं. एशिया की एकमात्र मटर मंडी भी होशियारपुर में है.
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कुलमिलाकर मटर की खेती के लिए अधिक पानी नहीं चाहिए. 27 से 30 डिग्री तापमान में मटर की फसल अच्छी होती है. शायद यही कारण है देश के महान क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने झारखंड के रांची स्थित अपने फॉर्म हाउस में मटर की खेती शुरू की है. हाल के वर्षों में मटर की खेती मुनाफे का सौदा बनता जा रहा है. आने वाले सालों में मटर की खेती को लेकर किसान और जागरूक हो सकते हैं.News18 न्यूजलेटर
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First Published :
November 27, 2020, 07:26 IST











