Last Updated:March 11, 2026, 17:42 IST
अगर आप सुल्तानपुर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो हसनपुर का गेट, परमेश्वरी देवी धाम, निजाम पट्टी मंदिर, सगरा आश्रम और नंदगांव ढाबा जैसे स्थल आपके लिए खास हैं. ये स्थान इतिहास, अध्यात्म और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत मिश्रण पेश करते हैं, जहां आप परिवार के साथ पिकनिक और विजिट का पूरा आनंद ले सकते हैं.
अगर आप सुल्तानपुर में घूमने की योजना बना रहे हैं, तो शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित हसनपुर गांव का हसनपुर का गेट आपके लिए खास जगह साबित हो सकता है. यह सुल्तानपुर की सबसे बड़ी रियासत हसनपुर स्टेट का हिस्सा है, जिसका इतिहास गौरवशाली रहा है. कभी इसका साम्राज्य सुल्तानपुर से लेकर बिहार के गया तक फैला हुआ था और शेरशाह सूरी के समय इसे सेकेंड किंग ऑफ इंडिया का खिताब भी मिला था. हसनपुर का गेट परिवार के साथ छुट्टियां बिताने और पिकनिक के लिए बेहद खूबसूरत स्थल है.
परमेश्वरी देवी धाम प्रांगण को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया गया है. आगंतुकों की सुविधा के लिए मंदिर में हाल, प्रसाधन, इंटरलॉकिंग जैसी सुविधाएं बढ़ाई गई हैं. गर्भगृह में पत्थर लगाए गए हैं और दीवारों की रंगाई-पुताई कर मंदिर को खूबसूरत बनाया गया है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध पीने का पानी मिलेगा, रात में लाइट की व्यवस्था है और इच्छुक श्रद्धालु यात्री हाल में रुक भी सकते हैं. मंदिर के बगल में स्थित तालाब, घने पेड़ और चिड़ियों की चहचहाहट परिवार के साथ पिकनिक या विजिट को और भी सुखद बनाती है.
सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 3 किलोमीटर दूर निजाम पट्टी गांव में स्थित यह मंदिर शहर के पूरब दिशा में और गोमती नदी के दक्षिण दिशा में स्थित है. मंदिर में दो फ्लोर हैं, लेकिन किसी प्राकृतिक त्रासदी के दौरान भूतल वाला हिस्सा जमीन में धंस गया. प्रथम तल पर मठिया माता के दर्शन के लिए लोगों को संकरी जगह से गुजरना होता है. यह मंदिर एक ऐसा स्थल है जहां श्रद्धालुओं को शांति, सुकून और अध्यात्म की अनुभूति होती है. साथ ही, यहां गोमती नदी के किनारे प्राकृतिक वातावरण का आनंद भी लिया जा सकता है.
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सुल्तानपुर शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित सगरा आश्रम का इतिहास 500 साल से अधिक पुराना माना जाता है. आश्रम के महंत डॉ. स्वामी दयानंद मुनि के अनुसार, बाबा सहजराम लगभग 1600 ईस्वी में अयोध्या से लखनऊ होते हुए यहां आए और एक छोटी कुटिया बनाकर यहीं रहने लगे. आश्रम के सामने लगभग तीन एकड़ में फैला बड़ा सागर भी मौजूद है. यह स्थल इतिहास और अध्यात्म दोनों को समेटे हुए है, जहां परिवार के साथ जाकर पुरानी पेंटिंग्स, पुराने जमाने के दरवाजे, कुर्सियां, बग्गी और अन्य ऐतिहासिक चीजें देखी जा सकती हैं.
नंदगांव ढाबा एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट है, जहां आप अपने परिवार के साथ आराम से समय बिता सकते हैं. ढाबे के अंदर बच्चों के खेलने के लिए झूले हैं और ऊंचाई पर मचान, चारपाई, ग्रामीण उत्पादन से बनी मचिया और सेल्फी प्वाइंट भी मौजूद है, जो ढाबे को प्राकृतिक और आकर्षक लुक देते हैं. यह स्थान सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर, लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर स्थित है.
First Published :
March 11, 2026, 17:42 IST










