Last Updated:March 11, 2026, 18:38 IST
लखीमपुर खीरी के किसान अब पशुपालन पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है. मार्च के मौसम में दुधारू पशुओं के लिए बरसीम, गन्ने का अगौला और भूसा संतुलित आहार के रूप में दिया जाता है. सही डाइट चार्ट और व्यक्तिगत आहार तैयारी डेयरी व्यवसाय को सफल बनाने में मदद करता है.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में इस समय किसान पशुपालन पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है. बढ़ती दूध की मांग के चलते किसानों की आय में लगातार वृद्धि देखी जा रही है. वहीं, पशुपालन विभाग भी किसानों को जागरूक कर रहा है, जिससे आज के युवा डेयरी फार्मिंग की ओर आकर्षित हो रहे हैं और इस क्षेत्र में करियर बनाने में रुचि दिखा रहे हैं.
कुछ किसान और युवा जानकारी की कमी के कारण अपने पशुओं को संतुलित आहार नहीं देते, जिससे पशु बीमार हो जाते हैं और दूध उत्पादन में कमी आ जाती है. इस बार मार्च के मौसम में अचानक बदलाव देखा गया है, जो पशुओं के लिए हानिकारक साबित हो सकता है. ऐसे में संतुलित आहार और उचित देखभाल बेहद जरूरी है, ताकि पशु स्वस्थ रहें और दूध उत्पादन भी स्थिर बना रहे.
एनिमल एक्सपर्ट डॉ. एन.के. त्रिपाठी के अनुसार, बदलते मौसम में पशुओं की देखभाल बेहद जरूरी है. उन्हें दिन के समय तेज धूप से बचाकर पेड़ के नीचे या छायादार, हवादार बाड़े में रखना चाहिए. गर्मियों की शुरुआत में पशुओं को दिन में कम से कम दो-तीन बार पानी पिलाना जरूरी है. साथ ही दुधारू पशुओं की नांद (चारा खाने की जगह) को नियमित रूप से साफ रखना चाहिए, ताकि पशु स्वस्थ रहें और दूध उत्पादन स्थिर बना रहे.
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दुधारू पशुओं को मार्च के महीने में बरसीम आहार के रूप में देना लाभकारी होता है, क्योंकि इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और खनिज की अच्छी मात्रा पाई जाती है. इससे पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन में वृद्धि होती है. लेकिन ध्यान रहे, अधिक मात्रा में बरसीम देने से पशुओं का पेट फूलने लगता है, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में ही खिलाना चाहिए.
दुधारू पशुओं को मार्च के महीने में हरे चारे के रूप में गन्ने का अगौला खिलाया जा सकता है. ध्यान रहे कि गन्ने का अगौला भूसे में मिलाकर ही दिया जाए, जिससे दूध उत्पादन में वृद्धि होती है. लखीमपुर खीरी जिले के किसान भी अपने दुधारू पशुओं को गन्ने का अगौला आहार के रूप में देते हैं. गन्ने के अगौला में शुगर (शुक्रोज) अधिक मात्रा में पाया जाता है, जो पशुओं को ऊर्जा प्रदान करता है.
दुधारू पशुओं को भोजन उनकी बॉडी वेट का 3% से अधिक नहीं दिया जाना चाहिए. आहार में एक तिहाई भूसा (सूखा चारा) और दो तिहाई हरा चारा शामिल होना चाहिए. बेहतर दूध उत्पादन के लिए किसान को खुद अपना पशु आहार तैयार करना होगा, क्योंकि केवल बाजार के पशु आहार पर भरोसा करने से डेयरी व्यवसाय सफल नहीं हो सकता. इसके लिए पशु का डाइट चार्ट बनाना जरूरी है. दुधारू पशुओं को गेहूं, जौ या बाजरा का चोकर दिया जा सकता है, जिससे दूध उत्पादन में कमी नहीं आती और पशु स्वस्थ रहते हैं.
First Published :
March 11, 2026, 18:38 IST










