बिहार के बल्लेबाज आयुष ने बैटिंग से मचाया धमाल, मैच में बनाया अनोखा रिकॉर्ड

Last Updated:October 16, 2025, 12:06 IST

Bihar Ranji Trophy: बिहार के क्रिकेटर आयुष लोहारुका ने रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन किया. अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ उन्होंने 155 रन बनाए. उन्हें मैच के दौरान उनके पिता का पूरा सहयोग मिलता है.

भले ही बिहार टीम के लिए रणजी ट्रॉफी 2024-25 का सत्र खास नहीं रहा, लेकिन 21 वर्षीय बल्लेबाज आयुष लोहारुका ने कड़ी मेहनत का नमूना पेश करते हुए अपनी बल्लेबाजी से सबका ध्यान आकर्षित किया. अपने डेब्यू सीजन इन्होंने एक शतकीय और दो अर्धशतकीय पारी की मदद से पहले रणजी में 5 मैच खेलते हुए 315 रन बनाए.

आयुष का यह धाकड़ बल्लेबाजी करने का अंदाज अगले रणजी सीजन यानी इस साल भी जारी है. 15 अक्टूबर से शुरू हुए रणजी सत्र 2025-26 के पहले इनिंग में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ भी आयुष लोहारुका ने 247 गेंदों पर 37 चौके और 1 छक्का लगाकर 226 रन की प्रभावी पारी खेली. इस प्रदर्शन उन्होंने फिर से लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है. यह उनका दूसरा रणजी सीजन है.

आपको बता दें कि 22 वर्षीय आयुष लोहारुका दरभंगा के रहने वाले हैं. पिछले कई सालों से इनका प्रदर्शन शानदार रहा है. U-23 में इन्होंने 800 से अधिक रन बनाएं. इस प्रदर्शन के आधार पर पिछले रणजी सीजन में इनका सिलेक्शन हुआ था. शानदार प्रदर्शन के बदौलत इस साल भी इनका चयन किया गया और इन्होंने अपना अंदाज कायम रखा.

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अपने परफॉर्मेस पर आयुष कहते हैं,”पापा मुझे हमेशा क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित करते हैं. जब भी मैं बल्लेबाजी करने उतरता हूं, तो यही सोचता हूं कि मेरी दिवंगत मां और भाई मुझे देख रहे हैं. उन्हें और अपने पिता को गर्व महसूस कराने के लिए मैं हर बार अपना बेस्ट देने की कोशिश करता हूं”.

आयुष के पिता खुद क्रिकेट के बड़े शौकीन रहे हैं और शायद इसी वजह से आयुष का भी इस खेल के प्रति रुझान बढ़ा. आयुष बताते हैं कि पापा हमेशा कहते हैं कि तुम बस खेलते जाओ, बाकी सब मैं संभाल लूंगा. अपने पिता के प्रति गहरा लगाव व्यक्त करते हुए आयुष कहते हैं, “जो भी मेरे पास है या आगे मिलेगा, वह सब उन्हीं की देन है.”

आयुष को बचपन से ही क्रिकेट से लगाव था. स्कूल की स्लैम बुक में क्रिकेटर बनना ही लिखते थे. क्रिकेट के प्रति इस लगाव को देखते हुए परिवार भी उनका पूरा समर्थन करता था. माता-पिता और भाई हमेशा उनके हौसले को बढ़ाते थे. सभी का सपना था कि एक दिन आयुष भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी में नजर आए.

लेकिन जिंदगी ने अचानक एक बड़ा इम्तिहान लिया. आयुष की मां और भाई का असमय निधन हो गया. यह समय उनके हौसले को झकझोर देने वाला था, लेकिन तब उनके पिता ने उनका हाथ थामा, कंधे पर हाथ रखा और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.

आयुष ने लोकल 18 को बताया कि जब भी मैं मैदान पर उतरता हूं, तो ऐसा महसूस होता है कि मां और भाई मुझे देख रहे हैं. यह एहसास मुझे और ज्यादा मेहनत करने की ताकत देता है. आयुष के लिए यह सफर अभी शुरू हुआ है. आगे बहुत कुछ सीखना और करना बाकी है.

First Published :

October 16, 2025, 05:34 IST

Source

dainikupeditor@gmail.com

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