पशुपालक अगर अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो सरकार की नंदिनी कृषक समृद्धि योजना का लाभ लेकर अच्छा इनकम प्राप्त कर सकते हैं. पशुपालकों के लिए सरकार बड़ा मौका दे रही है. इस योजना में पशुपालक 25 गाय पालने के लिए 61.50 लाख रुपये तक की सहायता लेकर डेयरी शुरू कर सकते हैं और सरकार से भारी सब्सिडी भी पा सकते हैं. इस योजना के तहत पशुपालक 25 उच्च नस्ल की देसी गायों जैसे साहीवाल, गिर और थारपारकर नस्ल की गायों की डेयरी शुरू कर सकते हैं. खास बात यह है कि इस डेयरी यूनिट को स्थापित करने पर सरकार कुल लागत का 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है. यानी अधिकतम 31 लाख 25 हजार रुपये तक की सहायता मिल सकती है.
पशुपालकों के लिए फायदेमंद स्कीम
यह योजना पशुपालकों के लिए बहुत ही फायदेमंद है. इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें भी रखी गई हैं. आवेदन करने वाले पशुपालक के पास कम से कम 3 साल का पशुपालन का अनुभव होना चाहिए. इसके अलावा डेयरी के लिए कम से कम 1.5 एकड़ भूमि पर चारे की व्यवस्था होना अनिवार्य है. योजना के तहत डेयरी लगाने के लिए पशुपालक को कुल लागत का 15 प्रतिशत खुद निवेश करना होगा.
जरूरी दस्तावेज
इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए पशुपालक को कई तरह के दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं, जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासबुक, निवास प्रमाण पत्र, पशुपालन का 3 साल का अनुभव प्रमाण पत्र आदि. डेयरी चलाने या पशुपालन के लिए भूमि होना भी अनिवार्य है, ताकि पशुपालकों को पशुओं को पालने में किसी प्रकार की परेशानी न हो. इसलिए उन्हें जमीन का विवरण भी देना पड़ता है.
पशु चिकित्सा अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि पशुपालकों के लिए सरकार द्वारा बहुत ही अच्छी नंदिनी योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत पशुपालक पशुओं को पालकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं और इसे कमाई का जरिया बना सकते हैं. सरकार पशुपालकों को 50 प्रतिशत सब्सिडी के साथ धनराशि उपलब्ध करा रही है. यह 61.50 लाख रुपये की योजना है, जिसमें पशुपालकों को 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है.
स्वदेशी नस्लों के लिए सब्सिडी
नंदिनी योजना में 25 स्वदेशी गायों को पालने की व्यवस्था है. इसमें तीन स्वदेशी नस्लों थारपारकर, साहीवाल और गिर की गायों को पाल सकते हैं. इन गायों को राज्य के बाहर से लाना होता है. इसके लिए सरकार पशुपालकों को 61.50 लाख रुपये की सहायता देती है और 50 प्रतिशत यानी 31.25 लाख रुपये तक की सब्सिडी देती है. पशुपालकों को अपनी तरफ से केवल 15 प्रतिशत मूलधन खर्च करना होता है, इसके बाद बैंक से लोन लेकर पशुपालन का कार्य शुरू किया जा सकता है. अगर पशुपालक इन गायों का पालन शुरू करता है, तो विभाग समय-समय पर निरीक्षण भी करता है और सत्यापन के बाद सब्सिडी की राशि जारी की जाती है.
दूसरी योजना मिनी नंदिनी के नाम से चलाई जा रही है, जो 10 स्वदेशी नस्ल की गायों के लिए बनाई गई है. इसमें 23.60 लाख रुपये की योजना है और इसमें भी पशुपालक को 50 प्रतिशत की छूट दी जाती है.
गौ-सवर्धन योजना
तीसरी योजना मुख्यमंत्री द्वारा गौ-सवर्धन योजना के नाम से चलाई जा रही है. इस योजना में भी इसी प्रकार की गायों का पालन किया जाता है. यह योजना लगभग 2 लाख रुपये की है, जिसमें राज्य के बाहर से गाय लाने के लिए ट्रांसपोर्ट का खर्च भी दिया जाता है. इसमें पशुओं के चारे की व्यवस्था भी शामिल है. इस योजना में विभाग द्वारा 40 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाती है. पशुपालक इन सभी योजनाओं का लाभ लेकर आसानी से अपना पशुपालन का कार्य शुरू कर सकते हैं और अपनी आय बढ़ा सकते हैं. इसके लिए सरकार पूरी तरह से मदद कर रही है.
कैसे मिलेगा लाभ
इस योजना के लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाता है. इसका विज्ञापन समय-समय पर अखबारों में दिया जाता है, ताकि पशुपालक इसकी जानकारी पाकर आवेदन कर सकें और योजना का लाभ ले सकें. इस योजना के लिए पशुपालक अपने नजदीकी पशु चिकित्सा अस्पताल में जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और आवेदन कर सकते हैं.











