गन्ने में आखिर कैसे आती है मिठास? एक्सपर्ट से जानिए इसके पीछे छुपा साइंस

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गन्ने में आखिर कैसे आती है मिठास? एक्सपर्ट से जानिए इसके पीछे छुपा साइंस

Last Updated:March 12, 2026, 15:27 IST

Sugarcane Sweetness Science: गन्ने की फसल की असली कीमत उसकी लंबाई या मोटाई से नहीं, बल्कि उसमें मौजूद मिठास से तय होती है. विशेषज्ञों के अनुसार गन्ने में चीनी बनने की प्रक्रिया एक वैज्ञानिक और प्राकृतिक चक्र का हिस्सा है, जो फसल के परिपक्वता चरण में सबसे तेज होती है. इस दौरान मौसम, तापमान और सही खेती प्रबंधन का बड़ा असर पड़ता है. यदि किसान इस समय उर्वरकों और सिंचाई का सही तरीके से उपयोग करें, तो गन्ने में शर्करा की मात्रा बढ़ती है और चीनी मिलों को बेहतर रिकवरी मिलती है, जिससे किसानों की आमदनी भी बढ़ सकती है.

शाहजहांपुर: गन्ने की खेती में हम अक्सर उसकी लंबाई और मोटाई की चर्चा करते हैं, लेकिन उसकी असली कीमत उसके भीतर मौजूद मिठास से तय होती है. यह मिठास कोई अचानक होने वाली चीज नहीं है, बल्कि यह गन्ने के पूरे जीवन चक्र का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पड़ाव है. उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक बताते हैं कि गन्ने में चीनी का जमा होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे ‘शर्करा संश्लेषण’ कहा जाता है. यह पूरी प्रक्रिया मौसम और गन्ने के विकास के चरणों के बीच तालमेल से पूरी होती है.

कैसे बनती है गन्ने में मिठास?
गन्ने में मिठास बनने की प्रक्रिया मुख्य रूप से उसकी पत्तियों और तने के बीच चलती है. डॉ. पाठक के अनुसार, इसकी शुरुआत तब होती है जब गन्ना अपने ‘परिपक्वता चरण’ में प्रवेश करता है. इस दौरान पौधा अपनी शारीरिक बढ़त को धीमा कर देता है और अपनी पूरी ऊर्जा चीनी यानी सुक्रोज को इकट्ठा करने में लगा देता है. यही वह समय है जब गन्ने का रस गाढ़ा होना शुरू होता है और उसमें वह मिठास आती है जिसकी चीनी मिलों को तलाश रहती है.

मिठास में जलवायु और तापमान का बड़ा रोल
गन्ने में मिठास की मात्रा कितनी होगी, इसमें मौसम का सबसे बड़ा हाथ होता है. डॉ. संजीव कुमार पाठक ने बताया कि मिठास बनने के लिए दिन में आसमान का साफ रहना और तेज धूप निकलना बहुत जरूरी है. दिन की यह गर्मी पत्तियों में भोजन बनाने की प्रक्रिया को तेज करती है. वहीं, रात के समय जब तापमान गिरता है और खुशनुमा ठंडक होती है, तब गन्ने का पौधा उस भोजन को चीनी में बदलना शुरू कर देता है. यही कारण है कि अक्टूबर से दिसंबर तक का मौसम चीनी की बेहतरीन रिकवरी के लिए सबसे अच्छा माना जाता है.
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विकास के चरणों से तय होती है मिठास
गन्ने के जीवन चक्र में मिठास का एक निश्चित समय होता है जो इसके विकास के अलग-अलग चरणों से होकर गुजरता है. शुरुआत में रोपाई के बाद करीब 45 दिन इसके जमाव के होते हैं और फिर अगले 150 दिनों तक ब्यात की प्रक्रिया चलती है. इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण ‘ग्रैंड ग्रोथ फेज’ आता है, जो 150 से 270 दिनों के बीच का होता है. इस दौरान गन्ना औसतन 4.9 इंच प्रति सप्ताह की दर से लंबाई पकड़ता है. जब यह ग्रोथ फेज पूरा हो जाता है, तब अक्टूबर से परिपक्वता का दौर शुरू होता है, जहां गन्ने की लंबाई के बजाय उसके वजन और मिठास पर काम शुरू होता है.

परिपक्वता की पहचान और सावधानी
जब गन्ना पकने की अवस्था में आता है, तो उसकी बढ़त रुक जाती है और सुक्रोज का जमाव अपने चरम पर पहुंच जाता है. डॉ. पाठक ने स्पष्ट किया कि इस समय की गई छोटी सी लापरवाही मिठास को कम कर सकती है. उदाहरण के तौर पर, अगर इस समय यूरिया का अधिक प्रयोग किया जाए, तो पौधा फिर से बढ़ने की कोशिश करने लगता है जिससे उसकी मिठास घट जाती है. इसलिए गन्ने की मिठास को उसके पकने की सही अवधि और वैज्ञानिक कृषि तकनीक से जोड़कर देखा जाता है, तभी मिलों को अच्छी रिकवरी और किसानों को सही लाभ मिल पाता है.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

Location :

Shahjahanpur,Uttar Pradesh

First Published :

March 12, 2026, 15:27 IST

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dainikupeditor@gmail.com

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