Last Updated:January 02, 2026, 13:44 IST
Profitable Tomato Farming: जनवरी की ठंड में टमाटर की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा बन सकती है, लेकिन कुछ छोटी गलतियां भारी नुकसान भी करा सकती हैं. शाहजहांपुर समेत उत्तर भारत में इस समय किसान टमाटर की रोपाई की तैयारी कर रहे हैं. इस खबर में जानिए कैसे सही मिट्टी, पोषक तत्व और सिंचाई पर ध्यान देकर इस मौसम में फसल की गुणवत्ता और मुनाफा दोनों बढ़ाया जा सकता है.
शाहजहांपुर: जनवरी की कड़ाके की ठंड के बीच उत्तर भारत के किसान अगली फसल की तैयारियों में जुट जाते हैं. शाहजहांपुर सहित कई जिलों में किसान इस समय टमाटर की बड़े पैमाने पर खेती की योजना बना रहे हैं. इस मौसम में टमाटर की खेती से अच्छा मुनाफा मिलने की उम्मीद रहती है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही पूरी फसल को नुकसान भी पहुंचा सकती है. ठंड के मौसम में ओस और नमी जहां पौधों के लिए फायदेमंद होती है, वहीं तापमान में अधिक गिरावट और मिट्टी का असंतुलन किसानों के लिए परेशानी बन सकता है.
पोषक तत्वों की कमी बनती है परेशानी
जनवरी में रोपी जाने वाली टमाटर की फसल में अक्सर फल फटने की समस्या देखने को मिलती है. इसका सीधा असर फसल की गुणवत्ता और बाजार कीमत पर पड़ता है. कई किसान ऊसर जमीन में टमाटर की रोपाई कर देते हैं, जहां मिट्टी की संरचना सही नहीं होती. इसके कारण फल विकसित तो हो जाते हैं, लेकिन पकने के दौरान फटने लगते हैं. इससे पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है.
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक बताते हैं कि टमाटर में फल फटने की समस्या एक गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली समस्या है. इसका मुख्य कारण मिट्टी में बोरान नामक सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी और सिंचाई में अनियमितता है. जब लंबे समय तक सूखा रहता है और फिर अचानक नमी बढ़ जाती है, तो फल की बाहरी परत उतनी तेजी से नहीं फैल पाती और फल फट जाता है.
देखरेख है सबसे जरूरी
डॉ. पुनीत कुमार पाठक के अनुसार टमाटर की खेती में सही मिट्टी का चयन बेहद जरूरी है. संतुलित और उपजाऊ मिट्टी में उगाई गई फसल न सिर्फ सुरक्षित रहती है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी बेहतर होती है. किसानों को खेत में नमी का स्तर बनाए रखना चाहिए और सूखे की स्थिति में भी नियमित सिंचाई करनी चाहिए, ताकि अचानक बारिश या अधिक नमी से पौधों को झटका न लगे.
बंपर उपज के लिए अपनाएं ये उपाय
टमाटर की अच्छी गुणवत्ता और बेहतर पैदावार के लिए मिट्टी में बोरान की कमी को पूरा करना जरूरी है. किसान प्रति हेक्टेयर 20 से 25 किलोग्राम बोरान का प्रयोग करें. इसके अलावा, फल लगने की अवस्था में 0.25 प्रतिशत बोरेक्स के घोल का 2 से 3 बार छिड़काव करने से फल फटने की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाती है. इन उपायों को अपनाने से न सिर्फ फसल सुरक्षित रहती है, बल्कि टमाटर की चमक, आकार और बाजार मूल्य भी बढ़ता है.
अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से टमाटर की खेती करें और मिट्टी व सिंचाई पर विशेष ध्यान दें, तो जनवरी की ठंड में भी बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है. सही प्रबंधन से फसल की गुणवत्ता सुधरती है और बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ सकती है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
Location :
Shahjahanpur,Uttar Pradesh
First Published :
January 02, 2026, 13:44 IST
टमाटर के फल फटने से गिर रहा दाम? अपनाएं ये उपाय, मार्केट में मिलेगी अच्छी कीमत










