कानपुर: केंद्र सरकार द्वारा ओमान के साथ किए गए कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट यानी CEPA ने उत्तर प्रदेश और खासकर कानपुर के निर्यातकों के लिए नई उम्मीद जगा दी है. अमेरिकी टैरिफ के कारण दबाव झेल रहे निर्यातकों को अब गल्फ देशों में कारोबार बढ़ाने का मजबूत विकल्प मिल गया है. जानकारों का मानना है कि ओमान से शुरू हुआ यह समझौता आगे चलकर पूरे गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल देशों के साथ व्यापार के नए रास्ते खोल सकता है.
ओमान से शुरू हुआ समझौता, गल्फ तक पहुंचेगा फायदा
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन FIEO के विशेषज्ञों के अनुसार ओमान जीसीसी देशों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. अभी तक उत्तर प्रदेश और कानपुर से ओमान के साथ लगभग 400 से 500 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार होता रहा है. सीईपीए लागू होने के बाद इस व्यापार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है. यह समझौता न सिर्फ ओमान तक सीमित रहेगा, बल्कि अन्य गल्फ देशों के लिए भी रास्ता खोलेगा.
कुवैत, बहरीन और UAE तक बढ़ सकता है निर्यात
सीईपीए के प्रभाव से अब कुवैत, बहरीन, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में भी निर्यात बढ़ने की संभावनाएं बन गई हैं. जानकारों का कहना है कि ओमान के साथ मजबूत व्यापारिक रिश्ते बनने से भारतीय निर्यातकों की साख अन्य जीसीसी देशों में भी बढ़ेगी. इससे उत्तर प्रदेश के उद्योगों को नए ऑर्डर और स्थायी बाजार मिलने की संभावना है.
मीट, कृषि और खाद्य उत्पादों को मिलेगा बढ़ावा
FIEO के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव के अनुसार उत्तर प्रदेश और कानपुर से पहले से ही गल्फ देशों को मीट उत्पाद, कृषि और खाद्य सामग्री का निर्यात होता रहा है. अब सीईपीए के चलते इन उत्पादों पर शुल्क कम होने की उम्मीद है. इससे अमेरिकी बाजार पर निर्भरता घटेगी और निर्यातकों को वैकल्पिक बाजार मिलेंगे. जोखिम कम होने के साथ मुनाफे की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.
कानपुर के लेदर और फुटवियर उद्योग को राहत
कानपुर का लेदर और फुटवियर उद्योग लंबे समय से निर्यात पर निर्भर रहा है. गल्फ देशों में भारतीय चमड़ा उत्पादों की मांग लगातार बनी रहती है. सीईपीए के बाद इन उत्पादों को नए खरीदार मिलने की संभावना है. इससे कानपुर के छोटे और मध्यम उद्योगों को संजीवनी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
उद्योग जगत में बढ़ा भरोसा और उत्साह
कानपुर की लेदर कारोबारी प्रेरणा वर्मा का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से कारोबार में सुस्ती थी, लेकिन अब गल्फ देशों में नए सिरे से निर्यात का मौका मिलेगा. उन्होंने इसे केंद्र सरकार की सराहनीय पहल बताया. वहीं इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन IIA के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य का कहना है कि जीसीसी देशों के साथ व्यापार भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर है. अगर इसे सही तरीके से भुनाया गया तो उत्तर प्रदेश के उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी.
भविष्य में जीसीसी देशों संग एफटीए की उम्मीद
FIEO के अनुसार जिस तरह भारत ने न्यूजीलैंड और अन्य देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं, उसी तरह भविष्य में जीसीसी देशों के साथ भी एफटीए हो सकता है. इससे भारतीय उत्पादों पर लगने वाला शुल्क और कम होगा. निर्यात अधिक सस्ता और प्रतिस्पर्धी बनेगा. ओमान के साथ हुआ सीईपीए समझौता यूपी और कानपुर के निर्यातकों के लिए नए बाजार, बेहतर मुनाफे और वैश्विक विस्तार का रास्ता खोलने वाला साबित हो सकता है.











