अलीगढ़: बांग्लादेशी क्रिकेट खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को लेकर फिल्म अभिनेता शाहरुख खान के फैसले पर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. इस मामले में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से शाही मुफ़्ती मौलाना इफराहीम हुसैन ने कड़ा रुख अपनाते हुए पत्र के जरिए फतवा जारी किया है. मौलाना का कहना है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के बीच ऐसा फैसला इंसानियत, वतनपरस्ती और इस्लामी शिक्षाओं के खिलाफ है.
मुस्तफिजुर रहमान को लेकर बढ़ा विवाद
अलीगढ़ में यह मामला उस वक्त चर्चा में आया, जब शाहरुख खान द्वारा बांग्लादेशी क्रिकेट खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को खरीदे जाने के फैसले पर सवाल उठाए गए. मौलाना इफराहीम हुसैन ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मौजूदा हालात में बांग्लादेश से जुड़े किसी भी तरह के आर्थिक या भावनात्मक सहयोग पर पुनर्विचार होना चाहिए. उनके मुताबिक यह सिर्फ खेल का मामला नहीं, बल्कि इंसानियत और देशहित से जुड़ा विषय है.
मौलाना इफराहीम हुसैन का कड़ा ऐतराज
शाही मुफ़्ती मौलाना इफराहीम हुसैन ने इस मुद्दे पर शाहरुख खान को एक पत्र भी लिखा है. उन्होंने कहा कि बीते कुछ समय से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार, ज़ुल्म और अमानवीय घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं. ऐसे में बांग्लादेश के किसी खिलाड़ी को खरीदना या समर्थन देना इंसानियत के खिलाफ है. मौलाना का कहना है कि इस तरह के फैसले से गलत संदेश जाता है.
इंसानियत और वतनपरस्ती का दिया हवाला
मौलाना ने कहा कि शाहरुख खान सिर्फ एक बड़े अभिनेता ही नहीं, बल्कि भारत के नागरिक और मुसलमान भी हैं. इस्लाम की शिक्षाओं में इंसानी हमदर्दी के साथ-साथ वतनपरस्ती को बेहद अहम माना गया है. ऐसे में जब देश के एक बड़े वर्ग में इस फैसले को लेकर नाराजगी है, तो शाहरुख खान को अपने कदम पर विचार करना चाहिए था. मौलाना के मुताबिक किसी भी फैसले में देश की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धता का तर्क
मौलाना इफराहीम हुसैन ने यह भी कहा कि भारत में प्रतिभाशाली और काबिल तेज गेंदबाजों की कोई कमी नहीं है. ऐसे में मुस्तफिजुर रहमान को टीम में शामिल करना न तो खेल की मजबूरी है और न ही देशहित में जरूरी. उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में ही बेहतरीन खिलाड़ी मौजूद हैं, तो फिर बांग्लादेशी खिलाड़ी को प्राथमिकता देना किस आधार पर सही ठहराया जा सकता है.
फैसला वापस लेने और माफी की मांग
मौलाना ने शाहरुख खान से मांग की है कि वे मुस्तफिजुर रहमान को वापस करें और इस फैसले के लिए देश की जनता से माफी मांगें. उन्होंने कहा कि अगर शाहरुख खान अपने फैसले से पीछे नहीं हटते हैं, तो इस्लामी नजरिए से उन्हें गुनाहगार माना जाएगा. उनका कहना है कि इस्लाम इंसानियत, न्याय और देशभक्ति को सर्वोपरि रखता है.
शाहरुख खान की जिम्मेदारी पर सवाल
मौलाना इफराहीम हुसैन ने आगे कहा कि शाहरुख खान को जो पहचान, शोहरत और सम्मान मिला है, वह भारत की वजह से मिला है. इसी पहचान के कारण उनकी छवि पूरी दुनिया में बनी है. इसलिए उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे सबसे पहले देश और देशवासियों की भावनाओं का सम्मान करें. उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक और मुसलमान के रूप में शाहरुख खान को इंसानी हमदर्दी को सही मायने में समझना चाहिए.
विवाद के और बढ़ने के संकेत
इस पूरे मामले के बाद यह विवाद और गहराने के संकेत दे रहा है. एक तरफ मौलाना का कड़ा विरोध और फतवे की बात सामने आई है, तो दूसरी ओर इस मुद्दे पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं. आने वाले दिनों में शाहरुख खान की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.











