लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के किसान अब गेहूं, धान और गन्ने जैसी पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रहना चाहते. लगातार बढ़ती लागत और सीमित मुनाफे के कारण किसान अब नई और लाभकारी फसलों की खोज कर रहे हैं. चंदन की खेती इसी सोच का परिणाम है, जो लंबे समय में किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकती है.
उत्तर भारत में चंदन की खेती बना नया प्रयोग
आमतौर पर चंदन के पेड़ दक्षिण भारत और पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाते हैं. उत्तर भारत में इसकी खेती बहुत कम देखने को मिलती है. लेकिन वैज्ञानिक तकनीक और बेहतर कृषि प्रबंधन के कारण अब मैदानी इलाकों में भी चंदन की खेती संभव हो गई है. यही वजह है कि लखीमपुर खीरी जैसे जिले में भी चंदन के बगीचे तैयार होने लगे हैं.
गडौसा रामापुर गांव के किसान ने पेश की मिसाल
खीरी जनपद के नकहा विकासखंड के गडौसा रामापुर गांव निवासी प्रगतिशील किसान राम सिंह वर्मा ने चंदन की खेती कर जिले में एक नई मिसाल कायम की है. उन्होंने अपने डेढ़ एकड़ खेत में सफेद चंदन के पौधे लगाकर इसे अपनी जमीन की सुगंधित पहचान बनाने का प्रयास किया है. उनका यह प्रयोग अब जिले में चर्चा का विषय बन गया है.
550 पौधों से शुरू की गई चंदन की बगिया
राम सिंह वर्मा बताते हैं कि उन्होंने करीब 550 सफेद चंदन के पौधे लगाए हैं. ये पौधे अब लगभग एक वर्ष के हो चुके हैं. उन्होंने यह पौधे कानपुर और मलिहाबाद से मंगवाए थे. पौधों को 3 से 4 फीट की दूरी पर लगाया गया है, ताकि उनके विकास में किसी तरह की बाधा न आए और पेड़ स्वस्थ रूप से बढ़ सकें.
12 से 15 साल में तैयार होता है चंदन का पेड़
चंदन की खेती धैर्य की मांग करती है. राम सिंह बताते हैं कि चंदन के पेड़ 12 से 15 वर्ष में पूरी तरह तैयार होकर बिक्री योग्य हो जाते हैं. हालांकि समय अधिक लगता है, लेकिन एक बार पेड़ तैयार हो जाने के बाद इससे होने वाली आमदनी किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होती है.
चंदन की लकड़ी की ऊंची कीमत
वर्तमान समय में सफेद चंदन की लकड़ी की बाजार में भारी मांग है. एक चंदन के पेड़ की कीमत सवा लाख से डेढ़ लाख रुपये तक आंकी जाती है. वहीं चंदन की लकड़ी प्रति किलो करीब 7,000 रुपये की दर से बिकती है. ऐसे में अगर एक किसान सही तरीके से चंदन की खेती करता है, तो करोड़ों रुपये की आमदनी संभव है.
कम पानी में होती है चंदन की खेती
राम सिंह वर्मा बताते हैं कि चंदन के पेड़ों को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. जलभराव वाली जमीन चंदन की खेती के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती. पौधों के आसपास साफ-सफाई और जल निकासी पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है. सप्ताह में केवल 2 से 3 लीटर पानी ही पर्याप्त होता है.
भविष्य की लाभकारी खेती बन सकता है चंदन
सही देखभाल, वैज्ञानिक तरीके और धैर्य के साथ चंदन की खेती किसानों के लिए भविष्य का बड़ा सहारा बन सकती है. लखीमपुर खीरी जिले में शुरू हुआ यह प्रयोग अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है. आने वाले समय में चंदन की खेती जिले की पहचान और किसानों की आय का मजबूत आधार बन सकती है.











