झांसी: यूपी के झांसी के ऐतिहासिक रानी लक्ष्मीबाई किले के आसपास कई स्थानों पर अवैध कब्जे देखने को मिल रहे हैं. दबंगों ने किले से जुड़ी जमीन पर अस्थायी और पक्के निर्माण कर लिए हैं. कहीं अस्थायी दुकानें लगाई गई हैं, तो कहीं पार्किंग और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं. नियमों के अनुसार किसी भी ऐतिहासिक धरोहर के 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है. इसके बावजूद झांसी किले के आसपास इस नियम का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है. कई जगहों पर वर्षों पुराने अवैध कब्जे अब स्थायी रूप ले चुके हैं.
इतिहासकारों ने जताई चिंता
जिले के इतिहासकारों का कहना है कि झांसी का किला शहर की आन, बान और शान का प्रतीक है. किले के आसपास हो रहे अवैध निर्माण उसकी ऐतिहासिक गरिमा को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है, जिससे भविष्य में किले को गंभीर खतरा हो सकता है.
दशकों पुराने हैं कई अवैध कब्जे
जानकारों के अनुसार किले की जमीन पर कुछ अवैध कब्जे कई दशकों पुराने हैं. समय-समय पर इन्हें हटाने के लिए कार्रवाई भी की गई, लेकिन प्रभावी निगरानी के अभाव में दोबारा कब्जे हो जाते हैं. इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं.
पुरातत्व विभाग ने पुलिस से की शिकायत
लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए पुरातत्व विभाग हरकत में आ गया है. विभाग के अधिकारियों ने अवैध कब्जों को लेकर पुलिस अधिकारियों से लिखित शिकायत की है और संरक्षित क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है.
कई जगह हुई कार्रवाई, कई मामले लंबित
पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ संरक्षक सहायक अभिषेक ने बताया कि किले के आसपास हो रहे अवैध कब्जों की जानकारी लगातार पुलिस को दी जा रही है. कुछ मामलों में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कब्जे हटवाए भी हैं, लेकिन अभी कई ऐसे स्थान हैं जहां अवैध निर्माण मौजूद हैं और उन पर कार्रवाई होना बाकी है.
स्थानीय लोगों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और इतिहास प्रेमियों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐतिहासिक धरोहर को अपूरणीय क्षति हो सकती है. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि किले के आसपास के पूरे क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कर संरक्षित किया जाए.
ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा पर सवाल
झांसी किले के आसपास हो रहे अवैध कब्जे सिर्फ एक स्थान की समस्या नहीं हैं, बल्कि यह ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी चेतावनी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन और पुरातत्व विभाग मिलकर ठोस कार्रवाई करें, तभी इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है.











