Last Updated:November 09, 2025, 10:05 IST
Aligarh News: मुस्लिम धर्मगुरु चीफ मुफ्ती ऑफ उत्तर प्रदेश मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने बताया कि इस्लाम में गोद लिए हुए बच्चे को अपने नाम से जोड़ना शरई तौर पर जायज़ नहीं है
अलीगढ़: आज के दौर में कई लोग अनाथ या बेसहारा बच्चों को गोद लेकर उनकी परवरिश करते हैं. मगर मुस्लिम समाज मे अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इस्लाम में गोद लिए गए बच्चे को अपने नाम से जोड़ना या उसे असली बेटे की तरह विरासत देना जायज़ है? इस बारे में लोकल 18 की टीम ने मुस्लिम धर्मगुरु चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन से खास बातचीत की.
बच्चे को अपने नाम से जोड़ना शरई तौर पर जायज़ नहीं
जानकारी देते हुए मुस्लिम धर्मगुरु चीफ मुफ्ती ऑफ उत्तर प्रदेश मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने बताया कि इस्लाम में गोद लिए हुए बच्चे को अपने नाम से जोड़ना शरई तौर पर जायज़ नहीं है यानी उसे अपने नाम से पहचान देना या उसके नाम के साथ अपने नाम को पिता के रूप में लगाना हराम माना गया है. बच्चे के नाम के साथ उसके असली बाप का नाम ही लगाया जाएगा, क्योंकि इस्लाम में निस्बत (वंश) असली बाप से जोड़ी जाती है.
क्या गोद लिए हुए बच्चे को मिल सकती है संपत्ति
उन्होंने बताया कि गोद लिया हुआ बच्चा सामाजिक तौर पर बेटा कहा जा सकता है, उसे प्यार किया जा सकता है, तालीम दी जा सकती है और चाहें तो उसे संपत्ति भी दी जा सकती है. लेकिन शरीयत के मुताबिक वह असली वारिस नहीं बनता है, क्योंकि विरासत केवल ब्लड रिलेशन वालों को ही मिलती है. मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति गोद लिए हुए बच्चे को संपत्ति देना चाहता है तो इसके लिए अन्य वैध तरीके मौजूद हैं. जैसे हिबा यानी कि गिफ्ट देना या वसीयत यानी कि विल बनाना. लेकिन विरासत का हक केवल खून के रिश्तेदारों को ही मिलता है.
क्या कहता है शरीयत
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय कानून के अनुसार गोद लिया हुआ बच्चा कानूनी रूप से वारिस बन सकता है और उसे विरासत में हिस्सा मिलता है. लेकिन शरीयत के कानून के मुताबिक, वारिस वही होगा जो खून का रिश्ता रखता है. गोद लिया हुआ बच्चा सिर्फ प्यार, परवरिश और तालीम का हकदार है, न कि असली विरासत का.
Location :
Aligarh,Aligarh,Uttar Pradesh
First Published :
November 09, 2025, 10:05 IST
इस्लाम में गोद लिया हुआ बच्चा क्या असली वारिस बन सकता है? जानिए यहां











