DDU Junction : हम गरीब लोग हैं… वोट देने के बाद भी फायदा नहीं, अगर पैसा नहीं होगा तो कौन पूछेगा हमें? जानें पूरा माजरा

चंदौली: छठ पूजा के समापन और बिहार चुनाव के पहले चरण की वोटिंग खत्म होते ही बड़ी संख्या में कामगार अपने रोजगार स्थलों की ओर लौटने लगे हैं. उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों से रोजगार की तलाश में देश के अलग-अलग हिस्सों में गए लोग अब अपने काम पर लौटने की जल्दी में हैं. इसी वजह से डीडीयू जंक्शन से गुजरने वाली सभी अप ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए 50 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं. बावजूद इसके यात्रियों का दबाव इतना अधिक है कि स्पेशल ट्रेनों से ज़्यादा भीड़ नियमित ट्रेनों में देखने को मिल रही है.

प्लेटफॉर्म पर भीड़, ट्रेनों में सीट की किल्लत

शनिवार को अप दिशा की कई प्रमुख ट्रेनों- पंजाब मेल, पाटलिपुत्र एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस, हिमगिरी एक्सप्रेस, जोधपुर एक्सप्रेस, धनबाद-लुधियाना एक्सप्रेस, पूर्वा एक्सप्रेस और पुरुषोत्तम एक्सप्रेस में जबरदस्त भीड़ रही. जनरल कोचों में यात्रियों की स्थिति ऐसी रही कि लोग दरवाजों और टॉयलेट में बैठकर सफर करने को मजबूर हो गए. ट्रेनों के भीतर यात्रियों को सांस लेने तक की जगह नहीं थी. लोग छतों, दरवाजों और गेट के पास किसी तरह जगह बनाकर यात्रा करते दिखे.

आरपीएफ और जीआरपी सतर्क, यात्रियों की सुरक्षा पर खास नजर

यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए हैं. आरपीएफ, जीआरपी और वाणिज्य विभाग की टीम प्लेटफॉर्म और कोचों में निगरानी रख रही है. स्काउट एंड गाइड की टीम भी सक्रिय है.
आरपीएफ निरीक्षक प्रदीप कुमार रावत ने बताया कि “भीड़ के बीच सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है. प्लेटफॉर्म पर ट्रेनों के रुकने के दौरान यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यात्री सुरक्षित तरीके से सवार और उतरें.”

टॉयलेट में सफर को मजबूर गरीब कामगार

लोकल-18 से बातचीत में यात्री धर्मेंद्र, जो बिहार के अररिया जिले के निवासी हैं और जबलपुर में काम करते हैं, ने अपनी मजबूरी साझा की. उन्होंने कहा, “ट्रेन में बैठने की जगह नहीं है, इसलिए टॉयलेट में बैठकर जा रहे हैं. बिहार में रोजगार नहीं है. छठ पूजा में घर गया था, अब वापस काम पर लौट रहा हूं. टिकट मिल गया, पर सीट नहीं.” धर्मेंद्र ने दुख जताते हुए कहा कि “हम गरीब लोग हैं. अगर बाहर नहीं जाएंगे तो पेट कैसे पालेंगे. सरकार की तरफ से मिलने वाली 10 हजार की सहायता भी नहीं मिली. वोट देने के बाद भी फायदा नहीं. अगर पैसा नहीं होगा तो कोई पूछेगा नहीं.”

रेलवे की चुनौती, बढ़ती भीड़ और सीमित संसाधन

रेल प्रशासन के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है. स्पेशल ट्रेनों के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों को संभालना आसान नहीं है. ट्रेनों की सीमित क्षमता और अधिक यात्रियों के कारण सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो रहा है. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त डिब्बे और ट्रेनें चलाई जाएंगी, ताकि यात्रियों को सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिल सके.

Source

dainikupeditor@gmail.com

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