6800 चूजों से लाखों की कमाई, रामपुर के सूरज की कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से बढ़ी आमदनी, जानिए पूरा फार्मूला

Poultry Farming in Rampur: रामपुर के गांव ककरोआ में रहने वाले सूरज पिछले दो साल से मुर्गी पालन का काम कर रहे हैं. आज यह काम उनकी आमदनी का एक मजबूत जरिया बन चुका है. हालांकि, मुर्गी पालन में सही जानकारी, रोज की मेहनत और मौसम के अनुसार देखभाल बेहद जरूरी होती है. खासकर सर्दियों में थोड़ी सी भी लापरवाही पूरे बैच को खराब कर सकती है.

दवाइयों की जिम्मेदारी होती है कंपनी की
मुर्गी पालन आमतौर पर कंपनियों के साथ कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम पर किया जाता है. सूरज सुकना कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं. कंपनी की ओर से किसान को चूज़े, दाना (फीड), दवाइयां और तकनीकी सलाह दी जाती है. यानी चूजों की नस्ल, फीड की गुणवत्ता और दवाइयों की जिम्मेदारी कंपनी की होती है.

दिन-रात रखी ताजी है तापमान पर निगरानी
वहीं, किसान को अपनी तरफ से जगह, शेड, बिजली, पानी, साफ-सफाई और रोजाना देखभाल करनी होती है. सूरज के फार्म में इस समय करीब 6,800 चूजे हैं. शेड पूरी तरह बंद रहता है, ताकि ठंडी हवा अंदर न जा सके. दिन-रात तापमान पर लगातार निगरानी रखी जाती है. सर्दियों में चूजों को गर्म रखना सबसे अहम होता है. सूरज बताते हैं कि शेड के अंदर 50 से 60 डिग्री तापमान बनाए रखा जाता है.

हीटर, बल्ब और पर्दों का किया जाता है इस्तेमाल
इसके लिए हीटर, बल्ब और पर्दों का इस्तेमाल किया जाता है. अगर तापमान गिर जाए तो चूज़े सुस्त पड़ जाते हैं और बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. शेड की जमीन पर धान की भूसी (भुर्जी) बिछाई जाती है, जिससे गर्मी बनी रहती है और नमी कंट्रोल में रहती है. गीली जमीन से चूजों को सर्दी लग सकती है, इसलिए भूसी को समय-समय पर पलटना और बदलना जरूरी होता है.

समय पर मिल जाती है दाना और दवाइयां
कंपनी की ओर से तय समय पर दाना और दवाइयां मिल जाती हैं. रोजाना साफ पानी देना बेहद जरूरी है, क्योंकि पानी की टंकी या पाइप गंदे होने पर चूजे बीमार पड़ सकते हैं. सूरज दिन में कई बार शेड का निरीक्षण करते हैं, ताकि कोई चूजा कमजोर या बीमार दिखे तो उसे तुरंत अलग किया जा सके. करीब 40 दिन में चूज़े पूरी तरह तैयार हो जाते हैं.

ढाई लाख तक होता है मुनाफा
यदि इस दौरान कोई बड़ी बीमारी नहीं फैली और मृत्युदर कम रही, तो नुकसान नहीं होता. इसके बाद कंपनी चूज़ों को उठवा लेती है और वजन के आधार पर किसान को भुगतान किया जाता है. सूरज के अनुसार, अगर पूरा बैच बिना बीमारी और नुकसान के निकल जाए, तो करीब ढाई लाख रुपए तक का मुनाफा हो सकता है.

Source

dainikupeditor@gmail.com

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