1981 में जब RK स्टूडियो में लगा सितारों का मेला, अमिताभ बच्चन बने वेटर, हकीकत में बदला आइडिया, साबित हुई साल की बड़ी हिट

नई दिल्ली. बॉलीवुड में स्टार-स्टडेड गानों की बात हो तो फराह खान की ‘ओम शांति ओम’ का टाइटल ट्रैक याद आता है, जहां दर्जनों सितारे एक साथ नजर आए थे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह ट्रेंड बहुत पहले शुरू हो चुका था? साल 1981 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘नसीब’ में निर्देशक मनमोहन देसाई ने ‘जॉन जानी जनार्दन’ गाने के जरिए बॉलीवुड की आधी से ज्यादा इंडस्ट्री को एक फ्रेम में उतार दिया था. इस गाने में राज कपूर, शम्मी कपूर, रणधीर कपूर, धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, राकेश रोशन, विजय अरोरा, वहीदा रहमान, शर्मिला टैगोर, माला सिन्हा, बिंदू, सिमी ग्रेवाल, सिंपल कपाड़िया और प्रेमा नारायण जैसे दिग्गज सितारे शामिल थे. यह शूटिंग आरके स्टूडियोज में एक हफ्ते तक चली और इसके पीछे की कहानी बेहद रोचक है.

इस गाने की शूटिंग का किस्सा हाल ही में मनमोहन देसाई के बेटे केतन देसाई ने सुनाया, जो उस वक्त महज 17 साल के थे. यूट्यूब पर मंजू रामानन टॉक्स पर बात करते हुए उन्होंने इस किस्से को शेयर किया और बताया कैसे उनके पिता ने इस असंभव लगने वाले आईडिया को हकीकत में बदलकर रख दिया.

जब मनमोहन देसाई ने अमिताभ बच्चन को बनाया वेटर

केतन ने बताया, ‘पापा अपने राइटर्स के साथ बातचीत कर रहे थे. किसी ने पूछा कि बैक-टू-बैक हिट्स के बावजूद वे हमेशा नर्वस क्यों रहते हैं? उन्होंने जवाब दिया, ‘तुम अभी सफलता का जश्न मना रहे हो, जबकि मैं सोच रहा हूं कि अगली बार ‘बार’ को कैसे ऊंचा उठाऊं.’ जब पूछा गया कि मल्टी-स्टारर फिल्म से बड़ा क्या हो सकता है, तो उन्होंने अचानक कहा, ‘क्या होगा अगर हम पूरी इंडस्ट्री को एक सीन में इकट्ठा कर लें?’ चूंकि अमिताभ बच्चन पहले से ही गाने में वेटर का रोल कर रहे थे, इसलिए उन्होंने एक पार्टी का सेटअप सोचा जहां सभी सितारे आएं और अमिताभ उन्हें सर्व करें.

17 साल के केतन देसाई पर आया बड़ा जिम्मा

केतन के मुताबिक, यह सुनकर वह घबरा गए. ‘मैंने बापू (मनमोहन देसाई) से कहा, ‘कहना आसान है, लेकिन इसे अंजाम कैसे देंगे?’ उन्होंने मुझे देखा और पूछा, ‘क्या तुम अपनी सैलरी से संतुष्ट हो?’ जब मैंने हां कहा, तो उन्होंने बस इतना कहा, ‘फिर इसे करके दिखाओ.’ उन्होंने खुद बड़े सितारों से बात की, जबकि बाकी सितारों को कोऑर्डिनेट करना, कॉस्ट्यूम का इंतजाम करना और लॉजिस्टिक्स मैनेज करना मेरी जिम्मेदारी थी.’

1981 की ये फिल्म साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म साबित हुई.

आरके स्टूडियो में लगा दिया था मेला!

इस शूट की तैयारियां बहुत ज्यादा करनी थीं. केतन बताते हैं, ‘आरके स्टूडियो में मेकअप रूम कम थे, इसलिए हमने अतिरिक्त कमरे और यहां तक कि टॉयलेट्स भी बनवाए. स्टूडियो के बाहर हमने एक मेले जैसा माहौल बनाया, जहां रोज नई चीजें आती थीं. कबाब, वेज और नॉन-वेज स्टॉल्स, चाट काउंटर्स… हर दिन कुछ नया. राज कपूर साहब ने कहा था, ‘मनमोहन, मुझे रोज मेला चाहिए.’ राज साहब ने इस गाने को बनाने में अहम भूमिका निभाई और उन्होंने मेरे पिता को आश्वासन दिया, ‘तुम चिंता मत करो, एक्टर्स को मैं संभालूंगा.’

सेट पर सबसे पहले पहुंचते थे राज कपूर

केतन बताते हैं, ‘राज कपूर हर दिन सबसे पहले पहुंचते थे और अपनी सीनियरिटी की वजह से कोई लेट नहीं होता था. शाम को वे मनमोहन को फीडबैक देते. गीतकार आनंद बख्शी से मनमोहन ने खास लाइन्स लिखवाईं. जैसे धर्मेंद्र के लिए उनकी टफ हीरो इमेज को हाइलाइट करने वाली लाइनों ने सेट पर माहौल खुशनुमा था. इस दौरान कलाकारों के बीच गजब की दोस्ती देखने को मिली. रणधीर कपूर ने मजाक करते हुए कहा, ‘हम दुनिया के सबसे महंगे जूनियर आर्टिस्ट बन गए हैं. अब तक लीड रोल निभाते थे और अब एक्स्ट्रा बन गए.’ इस पर राज कपूर ने गंभीरता से जवाब दिया- ‘फिल्म में चाहे हीरो हो या जूनियर आर्टिस्ट, सब बराबर होते हैं.’

‘जॉन जानी जनार्दन’ ने सेट किया नया ट्रेंड

यह गाना मोहम्मद रफी की आवाज में था और बॉलीवुड का आइकॉनिक मोमेंट बन गया. ‘नसीब’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया, साल की सबसे बड़ी हिट बनी. मनमोहन देसाई की फिल्में जैसे ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘धरम वीर’, ‘परवरिश’ और ‘कुली’ भी सुपरहिट रहीं, लेकिन ‘जॉन जानी जनार्दन’ ने एक नया ट्रेंड सेट किया. आज भी यह गाना मल्टी-स्टारर सीक्वेंस का बेंचमार्क है.

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dainikupeditor@gmail.com

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