₹49 वाली गैस हुई ₹120, खुर्जा के 30 हजार मजदूरों की रोजी-रोटी खतरे में

Khurja Pottery Industry Crisis: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग की तपिश अब बुलंदशहर जिले (Bulandshahr) के खुर्जा की गलियों तक पहुंच गई है. विश्व प्रसिद्ध ‘पॉटरी नगरी’ खुर्जा आज एक गहरे संकट के मुहाने पर खड़ी है. ईरान युद्ध के असर से गैस की कीमतों में जो ‘आग’ लगी है, उसने यहां की सैकड़ों भट्ठियों को ठंडा कर दिया है. ₹49 में मिलने वाली गैस रातों-रात ₹119.90 के करीब पहुंच गई है, जिससे खुर्जा का करोड़ों का कारोबार और 30 हजार मजदूरों का भविष्य दांव पर लग गया है.

वहीं, पॉटरी उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि बढ़े हुए दामों के बावजूद उन्हें पर्याप्त गैस नहीं मिल पा रही है. गैस की कमी और महंगाई के कारण खुर्जा की करीब 95 प्रतिशत पॉटरी इकाइयों में कामकाज लगभग ठप पड़ गया है.

मिडिल ईस्ट की जंग और खुर्जा का ‘पॉटरी उद्योग’ संकट में
दुनिया के नक्शे पर बुलंदशहर का ‘खुर्जा’ अपनी पॉटरी (मिट्टी के कलात्मक बर्तन) के लिए एक अलग पहचान रखता है. लेकिन आज इस पहचान पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. दरअसल, मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग का सीधा असर इस छोटे से शहर के कारखानों पर पड़ा है. युद्ध की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसके कारण मजदूरों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. पॉटरी व्यापारियों का कहना है कि जब फैक्ट्रियों में उत्पादन ही नहीं होगा तो मजदूरों का खर्च और वेतन निकालना भी मुश्किल हो जाएगा.

गैस के दामों में ढाई गुना की भारी बढ़ोतरी
खुर्जा पॉटरी उद्योग की रीढ़ ‘गैस’ है, लेकिन इसकी कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी ने उद्यमियों की कमर तोड़ दी है. फैक्ट्री संचालक व पॉटरी एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि राणा ने बताया कि ईरान युद्ध के बाद से गैस की सप्लाई और रेट दोनों में भारी बदलाव हो गया है, जिसके चलते कई फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं. उन्होंने कहा कि गैस के रेट बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं और इसके बावजूद भी समय पर गैस नहीं मिल पा रही है. वहीं, जहां पीएनजी गैस का रेट पहले करीब 49 रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 119 रुपये हो गया है, यानी दुगने से भी ज्यादा बढ़ोतरी हो गई है. केवल PNG ही नहीं, बल्कि LPG के रेट भी आसमान छू रहे हैं.

क्यों बंद हो रही हैं भट्ठियां?
पॉटरी एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि राणा बताते हैं कि पॉटरी इंडस्ट्री की तकनीक ऐसी है कि यहां ‘टनल भट्ठियां’ इस्तेमाल होती हैं. इन भट्ठियों की खासियत यह है कि इन्हें एक बार शुरू करने के बाद लगातार चलाना पड़ता है, इन्हें बीच में बंद नहीं किया जा सकता. लेकिन गैस की भारी किल्लत और बढ़े हुए दामों ने उद्योगपतियों को इन्हें मजबूरन बंद करने पर विवश कर दिया है. गैस जैसी कंपनियों ने रेट तो बढ़ा दिए हैं, लेकिन पर्याप्त मात्रा में सप्लाई सुनिश्चित नहीं कर पा रही हैं. प्रशासन की ओर से पहले आश्वासन दिया गया था कि 40 प्रतिशत गैस पुराने रेट पर मिलेगी, लेकिन अब भारी सिक्योरिटी मनी की मांग की जा रही है, जो छोटे उद्यमियों के बस की बात नहीं है.

30 हजार मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट
खुर्जा में करीब 300 पॉटरी यूनिट हैं, लेकिन उनमें से मुश्किल से 2 से 4 प्रतिशत ही चल पा रही हैं, बाकी लगभग सभी बंद पड़ी हैं. उन्होंने बताया कि फैक्ट्रियां बंद होने से सबसे बड़ी समस्या मजदूरों के सामने खड़ी हो गई है. खुर्जा की पॉटरी इंडस्ट्री में करीब 25 से 30 हजार मजदूर काम करते हैं, जिनमें ज्यादातर बाहर से आए हुए हैं. फैक्ट्रियां बंद रहने से उनके रहने-खाने की समस्या खड़ी हो रही है. अगर मजदूर यहां से चले गए तो पूरा उद्योग ठप हो सकता है. इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि सभी उद्योगपति डीएम से मिलकर अपनी समस्या रखेंगे और समाधान की मांग करेंगे.

सरकार से हस्तक्षेप की उम्मीद
इतना ही नहीं, गैस के दामों में इतनी अचानक और भारी बढ़ोतरी के बाद उद्योग को चलाना लगभग असंभव हो गया है. उनका कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उद्योग को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, जिसका असर हजारों परिवारों पर पड़ेगा. वहीं, पॉटरी उद्योग एसोसिएशन ने सरकार से जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है. एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को गैस की कीमतों पर नियंत्रण करने और उद्योग के लिए विशेष राहत देने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए, ताकि खुर्जा का प्रसिद्ध पॉटरी उद्योग संकट से बाहर निकल सके और मजदूरों की रोज़ी-रोटी बचाई जा सके.

Source

dainikupeditor@gmail.com

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