Last Updated:May 08, 2026, 13:22 IST
दुधवा नेशनल पार्क का मशहूर बाघ ‘गब्बर’ इन दिनों सैलानियों के बीच खास आकर्षण बना हुआ है. सफारी के दौरान इसके आसानी से दिख जाने पर पर्यटक रोमांचित हो उठते हैं. गब्बर अपने दम पर शिकार करने और जंगल में दबदबा बनाए रखने के लिए जाना जाता है.
दुधवा नेशनल पार्क में गब्बर बाघ आसानी से देखने को मिल जाता है. बाघ का दीदार करने के लिए देश-विदेश से सैलानी यहां आते हैं. जब सैलानियों को आसानी से गब्बर के दर्शन होते हैं, तो वे रोमांचित हो उठते हैं. गब्बर अकेले ही शिकार करता है और जंगल के संसाधनों पर उसका दबदबा कायम है. वह हिरण और सांभर जैसे शाकाहारी जानवरों का शिकार करता है. वहीं, इस नेशनल पार्क में एक सींग वाला गैंडा भी पाया जाता है.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में स्थित दुधवा नेशनल पार्क दुर्लभ वन्य जीवों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. यहां देश-विदेश से सैलानी वन्यजीवों का दीदार करने पहुंचते हैं. दुधवा नेशनल पार्क में बाघ, हाथी, गैंडा, भालू और हिरन जैसे कई वन्य जीव पाए जाते हैं. इनमें कुछ ऐसे दुर्लभ जीव भी शामिल हैं, जिनका दूसरे जंगलों में दिखना काफी मुश्किल हो चुका है, लेकिन दुधवा के जंगलों में इनके दीदार आसानी से हो जाते हैं. अगर आप भी दुधवा आकर वन्यजीवों को करीब से देखना चाहते हैं, तो 15 जून तक यहां पहुंचकर जंगल सफारी का आनंद ले सकते हैं.
दुधवा टाइगर रिजर्व घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए राहत भरी खबर है. अब जंगल सफारी पहले के मुकाबले सस्ती हो गई है. दुधवा के जंगलों में वन्यजीवों का दीदार करने के लिए सैलानी जिप्सी और जेनान गाड़ियों को किराए पर बुक करते हैं. पहले इन गाड़ियों का किराया 4100 रुपये था, जिससे पर्यटकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था. पर्यटकों को राहत देने के उद्देश्य से वन विभाग ने अब सफारी वाहनों के किराए में कटौती कर दी है. नई दरों के अनुसार अब पर्यटक मात्र 3600 रुपये में जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे. किराया कम होने से दुधवा आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
उत्तर प्रदेश वन निगम ने थारू हट डॉर्मेट्री और जंगल सफारी वाहनों के किराए में कटौती की नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी हैं. अब पर्यटक कम खर्च में जंगल सफारी और ठहरने का आनंद ले सकेंगे. उम्मीद जताई जा रही है कि किराए में कमी आने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो सकता है. दुधवा टाइगर रिजर्व में प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में सैलानी वन्यजीवों का दीदार करने पहुंचते हैं.
दुधवा में व्यवस्थाएं दो हिस्सों में बंटी हुई हैं. जंगल में प्रवेश, गाइड और रोड टैक्स की जिम्मेदारी टाइगर रिजर्व प्रशासन के पास है, जबकि थारू हट, डॉर्मेट्री और सफारी वाहनों (जिप्सी व जेनान) का संचालन वन निगम करता है. महंगाई के दौर में पर्यटकों को राहत देते हुए वन निगम ने अपने हिस्से के किराए में करीब 12 से 22 प्रतिशत तक की कटौती की है.
दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में कई दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजाति के सांप भी पाए जाते हैं. लंबी थूथन वाले वाइन स्नेक ‘अहेतुल्ला लॉन्गिरोस्ट्रिस’ की ब्राउन मॉर्फ प्रजाति उत्तर प्रदेश में पहली बार दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में देखी गई है. यह दुर्लभ और छिपकर रहने वाली प्रजाति जंगल की मिली-जुली पारिस्थितिकी और वास भूमि में पाई गई.
दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में अब जंगल सफारी और ठहरना पहले से सस्ता हो गया है, जिससे पर्यटक आसानी से जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे. सफारी के किराए में कटौती कर दी गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग दुधवा की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों का अनुभव ले सकें. अब पर्यटक आसानी से जंगल सफारी बुक कर दुधवा के खूबसूरत जंगलों में वन्यजीवों को करीब से देखने का रोमांच महसूस कर सकते हैं.
दुधवा टाइगर रिजर्व आने वाले पर्यटकों के लिए राहत भरी खबर है. अब पर्यटकों को थारू हट के एक कमरे के लिए 5500 रुपये की जगह 4900 रुपये खर्च करने होंगे. किराया कम होने से पर्यटक कम बजट में दुधवा के खूबसूरत जंगलों, वन्यजीवों और प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकेंगे. दुधवा टाइगर रिजर्व अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और वन्यजीवों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. किराए में कमी किए जाने से पर्यटन को बढ़ावा मिलने और पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है. साथ ही पर्यटक दुधवा के खूबसूरत वातावरण में आरामदायक ठहराव का भी आनंद ले सकेंगे.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तर प्रदेश की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|
Source










