Last Updated:March 11, 2026, 21:31 IST
Ghaziabad Harish Rana News: गाजियाबाद के अशोक राणा का परिवार पिछले 13 साल से अपने बेटे हरीश को कोमा की हालत में देख रहा था. दुख और आर्थिक स्थित की मार के बीच अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मदद का हाथ बढ़ाया है. मुख्यमंत्री के आदेश पर जिले के बड़े अफसर खुद उनके घर पहुंचे और तुरंत ढाई लाख रुपये की मदद दी. यही नहीं, बुजुर्ग माता-पिता का बुढ़ापा अच्छे से कटे, इसके लिए सरकार उन्हें एक दुकान भी दे रही है. 13 साल के दर्द के बाद सरकार की यह मदद इस परिवार के लिए एक बड़ा सहारा बनकर आई है.
हरीश राणा के परिवार की मदद के लिए पहुंची प्रशासन की टीम
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. राजनगर एक्सटेंशन की राज एम्पायर सोसाइटी में रहने वाले अशोक राणा का परिवार पिछले 13 वर्षों से एक असहनीय दर्द से गुजर रहा है. उनका 32 वर्षीय बेटा हरीश राणा साल 2013 से कोमा में है. इस दुखद घड़ी और आर्थिक तंगी के बीच अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस परिवार की ढाल बनकर खड़ी हुई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद आज बुधवार को जिला प्रशासन की टीम पीड़ित परिवार के घर पहुंची और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया.
प्रशासनिक अमला पहुंचा घर, तत्काल मिली मदद
मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़, जीडीए वीसी नंदकिशोर कलाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने अशोक राणा के निवास पर जाकर उनसे मुलाकात की. अधिकारियों ने परिवार की समस्याओं को विस्तार से सुना और मौके पर ही जनसहयोग के माध्यम से 2.5 लाख रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई.
देश का पहला ऐतिहासिक फैसला
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि भारत के न्यायिक इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने किसी नागरिक को ‘निष्क्रिय इच्छामृत्यु’ की अनुमति दी है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की बेंच ने मानवीय गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया. अदालत ने एम्स दिल्ली को निर्देश दिया है कि हरीश राणा को अस्पताल में भर्ती कर उनका लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटा दिया जाए. एम्स की मीडिया सेल इंचार्ज प्रोफेसर रीमा दादा ने पुष्टि की है कि अस्पताल अदालत के आदेशों का पूरी तरह पालन करेगा.
एक हादसे ने उजाड़ दी थीं खुशियां, 2013 से कोमा में हैं हरीश
हरीश राणा की कहानी किसी को भी झकझोर सकती है. साल 2013 में हरीश पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे. चंडीगढ़ में एक पीजी की चौथी मंजिल से गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट आई थी. तब से वे परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में हैं. मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, हरीश शत-प्रतिशत विकलांगता और ‘क्वाड्रिप्लेजिया’ (चारों अंगों का लकवा) से जूझ रहे हैं. वे न तो खुद सांस ले सकते हैं और न ही खाना खा सकते हैं. पिछले 13 सालों से उनकी सांसें मशीनों और पाइपों (ट्रेकियोस्टॉमी और गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी ट्यूब) के भरोसे टिकी हैं.
क्या है सुप्रीम कोर्ट का तर्क?
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जीवन केवल शारीरिक अस्तित्व का नाम नहीं है, बल्कि इसमें गरिमा का होना अनिवार्य है. यदि किसी व्यक्ति के ठीक होने की कोई गुंजाइश न बची हो और वह केवल मशीनों के सहारे जीवित हो, तो उसे इस कष्टकारी स्थिति से मुक्ति पाने का अधिकार है. ‘पैसिव यूथेनेशिया’ के तहत मरीज का इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है ताकि उसकी मृत्यु प्राकृतिक रूप से हो सके. भारत में ‘एक्टिव यूथेनेशिया’ (जहर या इंजेक्शन देकर मारना) अभी भी प्रतिबंधित है.
सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा परिवार
इस घटना से अशोक राणा का परिवार न केवल भावनात्मक रूप से टूट चुका है, बल्कि बेटे के लंबे इलाज ने उन्हें आर्थिक रूप से भी कमजोर कर दिया है. इसे देखते हुए गाजियाबाद प्रशासन ने परिवार को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का निर्णय लिया है. डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ ने कहा कि प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि परिवार को आगे जीवनयापन में कोई स्थिरता की कमी महसूस न हो.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
Location :
Ghaziabad,Uttar Pradesh
First Published :
March 11, 2026, 21:31 IST










