सर्दी-खांसी, पाचन और तनाव में राहत, तुलसी और जराकुश है लाजवाब, जानिए फायदे

Last Updated:January 02, 2026, 16:21 IST

वैद्य नंदू प्रसाद बताते हैं कि तुलसी और जराकुश जैसे औषधीय पौधे प्रकृति की अनमोल देन हैं. सही तरीके से उपयोग करने पर ये कई सामान्य बीमारियों में राहत दे सकते हैं और लोगों को स्वस्थ जीवन की ओर ले जा सकते हैं. आज के समय में, जब लोग फिर से प्राकृतिक उपचार की ओर लौट रहे हैं, इन पौधों की अहमियत और भी बढ़ गई है.

गोंडा: हमारे आस-पास कई ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं, जो बिना दवा के ही शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. इनमें तुलसी और जराकुश दो ऐसे चमत्कारी पौधे हैं, जिनका इस्तेमाल आयुर्वेद में सदियों से किया जाता रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इन दोनों पौधों में कई औषधीय गुण मौजूद हैं, जो विभिन्न बीमारियों में राहत देने और स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायक होते हैं.

लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य नंदू प्रसाद बताते हैं कि तुलसी को भारतीय संस्कृति में बेहद पवित्र माना जाता है. यह सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी अत्यंत फायदेमंद है. वहीं, जराकुश भी एक उपयोगी औषधीय पौधा है, जिसका इस्तेमाल कई घरेलू नुस्खों और आयुर्वेदिक उपायों में किया जाता है.

वैद्य नंदू प्रसाद बताते हैं कि तुलसी और जराकुश दोनों ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मददगार माने जाते हैं. इनके नियमित सेवन से सर्दी, खांसी, जुकाम और गले की खराश जैसी आम समस्याओं में राहत मिलती है. मौसम बदलने पर होने वाला वायरल बुखार या सामान्य कमजोरी, इन दोनों पौधों का काढ़ा शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में सहायक होता है. यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग बुखार और सर्दी-खांसी में इनका भरोसेमंद सहारा लेते हैं.

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पाचन तंत्र: आयुर्वेद में तुलसी और जराकुश दोनों का उपयोग पाचन संबंधी समस्याओं में भी फायदेमंद माना जाता है. ये गैस, अपच, पेट दर्द, दस्त और पेचिश जैसी दिक्कतों में राहत देने में सहायक होते हैं. साथ ही, ये पेट को साफ रखने और भोजन को आसानी से पचाने में मदद करते हैं. जिन लोगों को बार-बार पेट की समस्या रहती है, उनके लिए ये दोनों पौधे एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम करते हैं.

सांस से जुड़ी समस्याएं: आयुर्वेद में तुलसी और जराकुश को सांस से जुड़ी परेशानियों में भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. ये दमा, सांस फूलना और छाती में जकड़न जैसी समस्याओं में राहत देने में मदद करते हैं. साथ ही, ये फेफड़ों को मजबूत बनाने और बदलते मौसम में होने वाली एलर्जी व संक्रमण से बचाव करने में भी सहायक होते हैं.

त्वचा से जुड़ी समस्याएं: आयुर्वेद में तुलसी और जराकुश का इस्तेमाल त्वचा से जुड़ी समस्याओं में भी किया जाता है. फोड़े-फुंसी, खुजली, एलर्जी, छोटे घाव और जलन जैसी परेशानियों में इनके पत्तों का लेप या रस लगाने से आराम मिल सकता है. ग्रामीण इलाकों में लोग लंबे समय से घाव भरने और सूजन कम करने के लिए इनका भरोसेमंद उपयोग करते आ रहे हैं.

मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद: आयुर्वेद में तुलसी और जराकुश को मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है. इनके सेवन से तनाव कम होता है, मन शांत रहता है और नींद की समस्या में सुधार आ सकता है. इसके अलावा, ये पौधे जोड़ों के दर्द, बदन दर्द और सूजन जैसी शारीरिक समस्याओं में भी राहत पहुंचाने में मदद करते हैं.

वैद्य नंदू प्रसाद बताते हैं कि हालांकि तुलसी और जराकुश दोनों ही प्राकृतिक औषधियां हैं, लेकिन इनका उपयोग हमेशा सीमित मात्रा में और सही जानकारी के साथ करना चाहिए. किसी गंभीर या पुरानी बीमारी की स्थिति में डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है, ताकि इनके सेवन से कोई अनचाहा प्रभाव न हो.

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January 02, 2026, 16:21 IST

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