सर्दियों में कान ढकना क्यों है जरूरी, डॉक्टर ने बताया बुजुर्गों की नसीहत का साइंटिफिक सच, आप भी जानें

पीलीभीत: सर्दियों में घर के बड़े बुजुर्ग अक्सर कान ढककर बाहर निकलने की सलाह देते हैं. अधिकतर लोग इसे पुरानी सोच या दंतकथा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह नसीहत पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर सही है. पीलीभीत के वरिष्ठ फिजिशियन और आयुर्वेदाचार्य डॉ. आदित्य पांडेय ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि सर्दियों में कान खुले रखने से शरीर को कई गंभीर नुकसान हो सकते हैं.

बुजुर्गों की नसीहत के पीछे छिपा है विज्ञान
डॉ. आदित्य पांडेय के अनुसार सर्दियों में कान ढकने की सलाह बिल्कुल सही है. मेडिकल साइंस और आयुर्वेद दोनों इस बात की पुष्टि करते हैं कि कान शरीर का बेहद संवेदनशील हिस्सा होते हैं. ठंड के मौसम में लोग जैकेट, स्वेटर और दस्ताने तो पहन लेते हैं, लेकिन कानों को अक्सर खुला छोड़ देते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

कान हैं शरीर का कमजोर थर्मोस्टेट
डॉक्टर बताते हैं कि कान केवल सुनने का अंग नहीं हैं, बल्कि शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. कानों की बनावट में मांसपेशियां या वसा की सुरक्षात्मक परत नहीं होती. यहां त्वचा के ठीक नीचे तंत्रिकाओं का जाल होता है. ठंडी हवा सीधे कानों के जरिए शरीर के कोर टेम्परेचर को तेजी से गिरा सकती है.

थर्मल शॉक का बढ़ता खतरा
जब ठंडी हवा कान की नलिका और पर्दे से टकराती है, तो शरीर को अचानक ठंड का झटका लगता है. इसे थर्मल शॉक कहा जाता है. इससे सिर दर्द, चक्कर आना और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ज्यादा ठंड लगने पर यह स्थिति बुजुर्गों और बीपी मरीजों के लिए और भी खतरनाक हो जाती है.

वेगस नर्व और फेशियल नर्व पर असर
कानों के पीछे वेगस नर्व की शाखाएं होती हैं. अत्यधिक ठंड पड़ने पर यह नस उत्तेजित हो जाती है, जिससे अचानक चक्कर या तेज सिरदर्द शुरू हो सकता है. इसके अलावा कड़ाके की ठंड में फेशियल नर्व में सूजन आ सकती है. इससे चेहरे के एक हिस्से में अस्थायी लकवा जैसी स्थिति भी बन सकती है.

ब्लड प्रेशर पर पड़ता है सीधा असर
डॉ. पांडेय बताते हैं कि कान ठंडे होने पर शरीर की नसें सिकुड़ जाती हैं. इस संकुचन के कारण ब्लड प्रेशर अचानक 10 से 15 पॉइंट तक बढ़ सकता है. यह स्थिति हाइपरटेंशन से पीड़ित लोगों और बुजुर्गों के लिए बेहद जोखिम भरी हो सकती है.

इम्यूनिटी भी होती है कमजोर
कान ठंडे रहने से शरीर अपनी ऊर्जा केवल उन्हें गर्म रखने में खर्च करने लगता है. इससे संक्रमण से लड़ने वाली सफेद रक्त कोशिकाएं कमजोर पड़ जाती हैं. नतीजतन सर्दी, खांसी, वायरल और अन्य संक्रमण जल्दी पकड़ लेते हैं.

सर्दियों में क्या करें सावधानी
विशेषज्ञों की सलाह है कि सर्दियों में बाहर निकलते समय कानों को मफलर, टोपी या ईयर मफ्स से जरूर ढकें. खासकर सुबह और रात के समय ठंडी हवा से बचाव जरूरी है. यह छोटी सी सावधानी आपको कई गंभीर बीमारियों से बचा सकती है.

बुजुर्गों की सीख आज भी है प्रासंगिक
डॉ. आदित्य पांडेय का कहना है कि हमारे बुजुर्गों की दी गई कई नसीहतें अनुभव और विज्ञान दोनों पर आधारित होती हैं. सर्दियों में कान ढकना भी उन्हीं में से एक है. इसे अपनाकर हम न केवल स्वस्थ रह सकते हैं, बल्कि ठंड से होने वाली कई समस्याओं से भी बच सकते हैं.

Source

dainikupeditor@gmail.com

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