गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक युवा ने यह साबित कर दिया है कि अगर शौक को मेहनत और सही रणनीति के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो वह बड़ा व्यवसाय बन सकता है. गोंडा के रहने वाले राजेश सिंह ने मछली पालन को महज शौक के तौर पर शुरू किया था, लेकिन आज वही मत्स्य पालन उनका सफल बिजनेस बन चुका है और वह इससे लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये की कमाई कर रहे हैं.
छोटे स्तर से की थी मत्स्य पालन की शुरुआत
लोकल 18 से बातचीत के दौरान राजेश सिंह बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत में छोटे स्तर पर एक तालाब तैयार कर मछली पालन शुरू किया था. शुरुआत भले ही सीमित संसाधनों से हुई हो, लेकिन उन्होंने इसे पूरी गंभीरता और योजना के साथ आगे बढ़ाया. शुरुआती दौर में उन्होंने खुद सीखने और प्रयोग करने पर ज्यादा ध्यान दिया.
प्रशिक्षण और वैज्ञानिक तरीके बने सफलता की कुंजी
राजेश सिंह ने बताया कि मत्स्य पालन शुरू करने से पहले उन्होंने मत्स्य विभाग और क्षेत्रीय एक्सपर्ट्स से प्रशिक्षण लिया. उन्होंने मछलियों की देखभाल वैज्ञानिक तरीके से की. सही समय पर बीज डालना, संतुलित आहार देना और तालाब के पानी की गुणवत्ता बनाए रखना उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह रही.
उच्च शिक्षा के बाद नौकरी की जगह चुना व्यवसाय
राजेश सिंह बताते हैं कि उन्होंने एमएससी एजी तक की पढ़ाई की है. पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद उनके पास नौकरी के विकल्प थे, लेकिन उन्होंने नौकरी करने के बजाय अपने शौक को ही व्यवसाय में बदलने का फैसला किया. उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन से न सिर्फ उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है, बल्कि वह कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं और जलस्तर को मेंटेन करने में भी योगदान दे रहे हैं.
कम लागत से की शुरुआत, धीरे-धीरे बढ़ाया निवेश
राजेश सिंह के अनुसार उन्होंने मत्स्य पालन की शुरुआत करीब एक से डेढ़ लाख रुपये की लागत से की थी. लागत कम इसलिए आई क्योंकि उनके पास खुद का निजी तालाब था. समय के साथ जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता गया, उन्होंने व्यवसाय में निवेश भी बढ़ाया.
आज करोड़ों का निवेश और लाखों का टर्नओवर
राजेश सिंह बताते हैं कि वर्तमान समय में वह मत्स्य पालन में लगभग पौने दो करोड़ रुपये का निवेश कर चुके हैं. इस समय उनके मत्स्य पालन व्यवसाय से सालाना करीब 80 से 85 लाख रुपये का टर्नओवर हो रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में उनका टर्नओवर करोड़ रुपये से भी ऊपर जाएगा.
वैज्ञानिकों की देखरेख में हो रहा मत्स्य पालन
राजेश सिंह ने बताया कि उनका मत्स्य पालन आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की देखरेख में किया जा रहा है. किसी भी तरह की समस्या आने पर वह तुरंत विशेषज्ञों से सलाह लेते हैं, ताकि उत्पादन पर कोई असर न पड़े. भविष्य में वह वैज्ञानिकों के सहयोग से मत्स्य पालन की और भी आधुनिक तकनीकों को अपनाने की योजना बना रहे हैं.
कई प्रजातियों की मछलियों का हो रहा पालन
राजेश सिंह के तालाब में चाइनीस कार्प और इंडियन कार्प दोनों की प्रजातियों की मछलियां पाली जा रही हैं. चाइनीस कार्प में ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प, बिगहेड कार्प और कॉमन कार्प शामिल हैं. वहीं इंडियन कार्प में रोहू, भाकुर और नैनी प्रजाति की मछलियों का पालन किया जा रहा है.
अधिक उत्पादन देने वाली प्रजातियों पर फोकस
राजेश सिंह बताते हैं कि ग्रास कार्प और सिल्वर कार्प अत्यधिक उत्पादन देने वाली प्रजातियां हैं. इसी कारण वह मत्स्य पालन करने वाले अन्य किसानों को भी इन प्रजातियों को अपनाने की सलाह देते हैं. हालांकि बाजार में रोहू मछली की मांग अधिक रहती है, इसलिए संतुलन बनाकर सभी प्रजातियों का पालन किया जा रहा है.
24 हेक्टेयर में फैला है विशाल तालाब
राजेश सिंह ने बताया कि जिस तालाब में वह मत्स्य पालन कर रहे हैं, वह करीब 24 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है. बड़े क्षेत्रफल और वैज्ञानिक तरीके से किए जा रहे मत्स्य पालन की वजह से उत्पादन और मुनाफा दोनों लगातार बढ़ रहे हैं.
युवाओं के लिए बन रहे प्रेरणा स्रोत
राजेश सिंह की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो नौकरी के अलावा स्वरोजगार की तलाश में हैं. सही प्रशिक्षण, धैर्य और मेहनत के साथ मत्स्य पालन जैसे व्यवसाय से भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है.










