Last Updated:January 02, 2026, 14:04 IST
Agriculture News: बाराबंकी में किसान हरी मटर की खेती से कम समय में अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. अक्टूबर-नवंबर में बोई जाने वाली मटर 70 दिन में तैयार हो जाती है. फतहाबाद के किसान श्याम वर्मा दो बीघे में 50–60 हजार रुपये तक मुनाफा कमा रहे हैं.
बाराबंकी: आज के वक्त में किसान ऐसी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो कम समय और कम लागत में अधिक मुनाफा दे सके. इसी कारण अब किसान तेजी से मौसमी सब्जियों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, सब्जियों की खेती न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाती है, बल्कि बाजार में इनकी मांग भी हमेशा बनी रहती है. इन्हीं सब्जियों में हरी मटर एक ऐसी फसल है, जो किसानों को शानदार मुनाफा दिलाने की क्षमता रखती है. हरी मटर का इस्तेमाल सब्जी, नमकीन, फ्रोजन फूड, होटल और रेस्टोरेंट से लेकर घरों तक बड़े पैमाने पर किया जाता है. यही कारण है कि बाजार में इसकी मांग कभी कम नहीं होती. खास बात यह है कि हरी मटर की फसल कम समय में तैयार हो जाती है, जिससे किसान एक सीजन में अच्छा मुनाफा पा सकते हैं.
हरी मटर की बुवाई अक्टूबर से नवंबर के बीच सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसकी फसल ठंडे मौसम में अच्छी पैदावार देती है. मटर की खेती के लिए दोमट और जल निकासी वाली मिट्टी सबसे बेहतर होती है. जनपद बाराबंकी के फतहाबाद गांव के रहने वाले किसान श्याम कुमार वर्मा ने पारंपरिक फसलों के साथ साथ हरी मटर की खेती की शुरुआत की जिसमें उन्हें अच्छा फायदा हुआ. आज वह करीब दो बीघे में हरी मटर की खेती कर एक फसल पर 50 से 60 हजार रुपए मुनाफा कमा रहे हैं.
हरी मटर की खेती करने वाले किसान श्याम कुमार वर्मा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि वैसे तो हम ज्यादातर हरी सब्जियों की खेती करते हैं, क्योंकि इनमें फायदा अन्य फसलों के मुकाबले कहीं अधिक है. इस समय हमारे पास करीब दो बीघे में चाइनीज किस्म की मटर लगी है और निकल भी रही है. इस फसल में लागत की बात करें तो एक बीघे में 3 से 4 हजार रुपये आती है और मुनाफा करीब 50 से 60 हजार रुपए तक हो जाता है. चाइनीज मटर की खास बात यह है कि अन्य किस्मों के मुकाबले अधिक पैदावार देती है और इसकी जो फली होती है काफी लंबी होने क़े साथ साथ काफ़ी मिठी होती है. जिस वजह से इसकी बाजार में मांग अधिक रहती है और ये फसल कम समय में अच्छा मुनाफा देकर के जाती है.
इसकी खेती करना बहुत ही आसान है. सबसे पहले खेत को अच्छी तरह तैयार किया जाता है. फिर इसमें गोबर वह अन्य खाद का छिड़काव करके खेत को समतल करके मटर के बीजों की बुवाई खुरपी के द्वारा लाइन टू लाइन की जाती है .इसका पौधा निकलने के दो सप्ताह बाद इसकी सिंचाई की जाती है. वहीं मटर की बुवाई करने के महज 70 दिन बाद फसल निकलने लगती है, जिसको तोड़कर बाजारों में बिक्री कर सकते हैं.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें
Location :
Bara Banki,Uttar Pradesh
First Published :
January 02, 2026, 14:04 IST
लागत 3 से 4 हजार…कमाई 60 से 70 हजार, मालामाल बना देगी यह खेती










