यूपी वालों हो जाओ खुश, बिजली विभाग देने वाला है पैसा, 1020000000 रुपये मिलेंगे

Last Updated:January 02, 2026, 19:32 IST

आयोग ने यह आदेश दिया है कि 102 करोड़ रुपये राशि उपभोक्ताओं के बिजली बिल में समायोजित की जाए. इस फैसले को लेकर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयोग अध्यक्ष अरविंद कुमार और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से मुलाकात कर आभार जताया है.

बिजली विभाग लौटाएगा पैसा.

लखनऊः उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने पूरे सूबे के लिए कास्ट डाटा बुक जारी कर दी है. इसके बाद स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है. आयोग के मुताबिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर की असली लागत 2800 रुपये है, जबकि डिस्ट्रीब्यूटर कंपनियों ने बिना परमिशन 6016 रुपये हर एक मीटर पर वसूले थे. इस अधिक वसूली के कारण यूजर्स को 102 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था.

102 करोड़ रुपये वापस किए जाएंगे
आयोग ने यह आदेश दिया है कि 102 करोड़ रुपये राशि उपभोक्ताओं के बिजली बिल में समायोजित की जाए. इस फैसले को लेकर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयोग अध्यक्ष अरविंद कुमार और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से मुलाकात कर आभार जताया है. बता दें कि आयोग ने तय किया है कि सिंगल फेस स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अधिकतम कीमत 2800 रुपये और थ्री फेस स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए अधिकतम कीमत 4100 रुपये ही बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं से वसूल कर सकती हैं.

318470 उपभोक्ताओं ने जमा किए थे
प्रदेश की बिजली कंपनियों ने बिना नियामक आयोग की अनुमानित 9 सितंबर 2025 को एक आदेश जारी कर सिंगल फेस स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत 6016 रुपये और थ्री फेस की कीमत 11341 रुपये वसूलना शुरू कर दिया था. 10 सितंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक प्रदेश में 3 लाख 18 हजार 740 विद्युत उपभोक्ताओं ने एस्टीमेट जमा किया, जिनमें लगभग 90 फीसदी उपभोक्ता सिंगल फेस के थे.

102 करोड़ रुपये राशि वापस करनी होगी
अगर मनमानी दर 6016 रुपये के आधार पर आकलन किया जाए तो कुल वसूली लगभग 191 करोड़ रुपये होती है, जबकि नियामक आयोग द्वारा निर्धारित 2800 रुपये की दर से यह राशि लगभग 89 करोड़ रुपये होती है. इस तरह बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं के बिल में 102 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वापस करनी होगी. अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह सर्वविदित है कि स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से पोस्टपेड और प्रीपेड दोनों मोड में काम करता है. इसलिए उपभोक्ता की सहमति के बिना प्रीपेड मोड में कनेक्शन देना विद्युत अधिनियम के खिलाफ है.

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Prashant Rai

प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें

First Published :

January 02, 2026, 19:32 IST

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