यूपी में साइबर फ्रॉड बना सबसे बड़ा अपराध, डीजीपी राजीव कृष्ण ने किया खुलासा, बताया क्राइम क्यों बढ़ रहा?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार 1991 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी राजीव कृष्णा ने अपना एक्शन मोड चालू कर दिया है. प्रदेश में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों को लेकर डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि कुल अपराधों में जितनी रकम लोगों ने खोई, उससे तीन गुना से ज्यादा रकम साइबर फ्रॉड में गई है.

उन्होंने कहा कि दुर्दांत अपराधियों से निपटने के लिए हमारी दूसरी रणनीति है और अन्य अपराधों के लिए अलग है. लोभ, लत और भय के कारण लोग तेजी से साइबर फ्रॉड का शिकार बन रहे हैं. कम समय में पैसा दोगुना या अधिक लाभ का लालच देकर साइबर ठगी की जा रही है. कई लोग ऑनलाइन गेम्स की लत के चलते भी साइबर ठगी के जाल में फंस जाते हैं. आमतौर पर 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग और पेंशनर्स साइबर ठगी का ज्यादा शिकार हो रहे हैं.

हर थाने पर साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था

उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध से निपटने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. प्रदेश में कुल 1581 थाने हैं और प्रत्येक थाने पर साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा हर जिले में एक साइबर थाना कार्यरत है. साइबर अपराध से निपटने के लिए अब तक 65 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है.

इस संबंध में डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि कई बैठकों और सम्मेलनों के जरिए अफसरों और पुलिसकर्मियों को साइबर क्राइम के प्रति संवेदनशील और सक्षम बनाया गया है. उन्होंने कहा कि प्रदेश की पुलिस साइबर अपराध से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.

लालच के कारण 72 फीसदी साइबर अपराध

डीजीपी ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक तरीके से फंसाते हैं. आंकड़ों के अनुसार, 72 फीसदी साइबर अपराध लालच के कारण होते हैं. अब तक एक लाख से अधिक साइबर जागरूकता बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं. इसके साथ ही शॉर्ट फिल्मों के जरिए भी साइबर जागरूकता फैलाने का काम किया जा रहा है. उन्होंने लोगों से अपील की है कि कोई भी सरकारी संस्था जैसे पुलिस, सीबीआई, ईडी या इनकम टैक्स ऑनलाइन रकम ट्रांसफर करने के लिए कभी नहीं कहती है. जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है.

इस नंबर पर तुरंत दें जानकारी

उन्होंने बताया कि साइबर ठगी का शिकार होने पर पीड़ित को सबसे पहले 1930 नंबर पर कॉल कर जानकारी देनी चाहिए. इस नंबर के माध्यम से ठगी की रकम को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाती है. एक साल पहले तक केवल 9 फीसदी ठगी की रकम ही फ्रीज हो पाती थी, जो अब बढ़कर 26 से 27 फीसदी तक पहुंच गई है.

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dainikupeditor@gmail.com

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