“मां की नीलामी मत करो”, बलिया में गंगा के नाम पर फूट पड़ा मछुआरों का दर्द, गंगा किनारे उजड़ते परिवारों की कहानी

बलिया: जब बात मां की आती है, तो संघर्ष खुद सड़कों पर उतर आता है. कुछ ऐसा ही दृश्य बलिया जनपद के कलेक्ट्रेट परिसर में देखने को मिला, जहां गंगा की नीलामी के विरोध में मछुआरा समाज का दर्द फूट पड़ा. पुरुषों के नारों और महिलाओं के करुण गीतों ने इस प्रदर्शन को भावनात्मक और ऐतिहासिक बना दिया.

कलेक्ट्रेट परिसर में गूंजा मछुआरों का आक्रोश
डीएम कार्यालय परिसर में एक ओर पुरुष मछुआरे “गंगा मां की नीलामी बंद करो” के नारे लगा रहे थे, तो दूसरी ओर महिलाएं रोते-बिलखते हुए गीत गा रही थीं. छोटे बच्चों की मौजूदगी ने इस विरोध को और भी संवेदनशील बना दिया. हर चेहरा चिंता और भविष्य के डर से भरा नजर आया.

महिलाओं का दर्द, रोजी रोटी का सवाल
मछुआरे की पत्नी धनावा देवी ने रोते हुए कहा कि अगर गंगा की नीलामी हो गई, तो उनके बच्चे भूखे मर जाएंगे. उनका कहना था कि मछली पकड़ना ही उनके परिवार की रोजी रोटी है. नीलामी होने पर यह अधिकार छिन जाएगा और उनका जीवन अंधकार में चला जाएगा.

कमाई का गणित, आधी रकम ठेकेदार की
रीता देवी ने बताया कि वह 100 रुपये की मछली बेचती हैं, जिसमें से 50 रुपये ठेकेदार ले लेता है. बचे हुए पैसों में घर चलाना बेहद मुश्किल हो जाता है. उन्होंने कहा कि ऐसे में परिवार की जरूरतें पूरी करना और बच्चों की पढ़ाई कराना नामुमकिन हो जाता है.

22 वर्षों से नहीं हुई थी नीलामी
मछुआरे तेज नारायण साहनी ने बताया कि पिछले 22 वर्षों से गंगा की नीलामी नहीं हुई थी. मछुआरे शांति से मछली पकड़ते थे और अपने परिवार का पालन पोषण करते थे. अब केवल 10 किलोमीटर के दायरे में नीलामी कर नया विवाद खड़ा कर दिया गया है.

ठेकेदारों पर गंभीर आरोप
मछुआरा समाज ने आरोप लगाया कि ठेकेदार उनके जाल फाड़ देते हैं, मारपीट करते हैं और नाव तक डुबो देते हैं. इस डर के माहौल में मछुआरे अपना काम नहीं कर पा रहे हैं. इससे उनके व्यवसाय और आजीविका दोनों पर संकट खड़ा हो गया है.

राजनीतिक समर्थन, भाजपा नेता उतरे मैदान में
इस आंदोलन में भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह भी मछुआरों के समर्थन में पहुंचे. उन्होंने कहा कि गंगा, गाय और गीता पवित्र हैं और इनकी नीलामी नहीं होनी चाहिए. गंगा राष्ट्रीय नदी है और किसी की निजी जागीर नहीं है. मां की नीलामी का विचार ही गलत है.

प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
सुरेंद्र सिंह ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी मामले को मैनेज कर रहे हैं. उन्होंने CRO पर डीएम को गुमराह करने का आरोप लगाया. साथ ही कहा कि “सबका साथ, सबका विकास” का नारा यहां खोखला साबित हो रहा है.

धार्मिक रंग, हनुमान चालीसा का पाठ
प्रदर्शन के दौरान मछुआरा समाज और समर्थकों ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया. महिलाओं ने वही गीत गाए, जो गंगा तट पर मुंडन संस्कार के समय गाए जाते हैं. यह दृश्य प्रशासन को झकझोर देने वाला था.

आंदोलन को तेज करने की चेतावनी
प्रशासन से कोई ठोस आश्वासन न मिलने पर मछुआरा समाज ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी. उनका कहना है कि जब तक गंगा की नीलामी बंद नहीं होगी, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं. यह लड़ाई अब केवल व्यापार नहीं, बल्कि अस्तित्व और सम्मान की बन चुकी है.

Source

dainikupeditor@gmail.com

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