Last Updated:March 11, 2026, 16:55 IST
बरेली के युवा अब अपनी पारंपरिक खेती को छोड़ जैविक खेती की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं. 29 वर्षीय संजीव गंगवार की खेती की यात्रा में आधुनिक और लाभदायक तकनीकों का समावेश है. संजीव गंगवार की यह कहानी वाकई प्रेरणादायक है. एक सुरक्षित बैंक की नौकरी छोड़कर आधुनिक खेती को अपनाना उनके साहस और विजन को दर्शाता है.हरियाणा, गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों का दौरा कर सफल किसानों से सीधा प्रशिक्षण लिया है. इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का सही इस्तेमाल पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक तकनीकों और नए तौर-तरीकों पर भरोसा किया.
ख़बरें फटाफट
बरेली: उत्तर प्रदेश बरेली के युवा अब अपनी पारंपरिक खेती को छोड़ जैविक खेती की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं. 29 वर्षीय संजीव गंगवार की खेती की यात्रा में आधुनिक और लाभदायक तकनीकों का समावेश है. संजीव गंगवार की यह कहानी वाकई प्रेरणादायक है. एक सुरक्षित बैंक की नौकरी छोड़कर आधुनिक खेती को अपनाना उनके साहस और विजन को दर्शाता है.
हरियाणा, गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों का दौरा कर सफल किसानों से सीधा प्रशिक्षण लिया है. इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का सही इस्तेमाल पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक तकनीकों और नए तौर-तरीकों पर भरोसा किया. जिस वजह से 29 वर्षीय संजीव गंगवार की कहानी बरेली के किसानों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है.
आधुनिक तकनीक से कर रहे खेती
संजीव गंगवार ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए बताया की उनकी खेती की यात्रा में आधुनिक और लाभदायक तकनीकों का समावेश है. वह इस समय एक एकड़ में बिना बीज का खीरा उगा रहे हैं और मोटा मुनाफा कमा रहे हैं. उनके और भी फ्यूचर फार्मिंग प्लान धरातल पर उतर रहे हैं. जिसमें वह ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी जैसी विदेशी फसल अपने फार्म हाउस पर जैविक खेती के जरिए उगा कर कम जगह मे अधिक लाभ कमाने की कोशिश में हैं. जिसकी प्रेरणा उन्होंने गुजरात और हरियाणा के दौरों से ली. शिमला मिर्च और रंगीन गोभी के बाजार में मांग को देखते हुए वे आधुनिक सब्जियों की खेती करते हैं. औषधीय पौधे वे अपनी रिसर्च के आधार पर कुछ औषधीय फसलों का भी परीक्षण कर रहे हैं. जो कम लागत में अच्छा मुनाफा देती हैं.
ड्रिप इरिगेशन के साथ खेत में करते हैं इस खाद का प्रयोग
संजीव अब बरेली के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से भी जुड़े हुए हैं. अन्य किसानों को इन तकनीकों के लिए प्रेरित कर रहे हैं. गंगवार बताते हैं कि उनके फार्म हाउस पर मल्टीलेयर फार्मिंग एक ही जमीन पर एक साथ कई ऊंचाइयों की फसलें उगाना ताकि जमीन और संसाधनों का पूरा उपयोग हो सके. ड्रिप इरिगेशन पानी की बचत और उर्वरकों को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचाने के लिए वे टपक सिंचाई प्रणाली का उपयोग करते हैं. जीवामृत और जैविक खाद हरियाणा के किसानों से सीखकर आए हैं. वे गाय के गोबर और गोमूत्र से बने जीवामृत का प्रयोग करते हैं ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और रसायनों पर खर्च कम हो. मल्चिंग मिट्टी की नमी बनाए रखने और खरपतवार को रोकने के लिए वे मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हैं.
About the Author
मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
Location :
Bareilly,Bareilly,Uttar Pradesh
First Published :
March 11, 2026, 16:55 IST










