बाराबंकी: मंत्री के सामने किसान का दर्द, कैमरे बंद कराने की दी धमकी

बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम (क्रेता-विक्रेता सम्मेलन) उस वक्त अखाड़े में तब्दील हो गया, जब एक किसान ने सीधे प्रदेश के उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के सामने अपनी पीड़ा सुनानी शुरू कर दी. मंच से जब मंत्री जी सरकार की उपलब्धियां गिना रहे थे, तभी एक किसान के सब्र का बांध टूट गया. उसने भरी सभा में चिल्लाकर कह दिया कि सरकार केवल बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत में किसानों की सुनने वाला कोई नहीं है.

हैरानी की बात यह रही कि जब किसान अपनी बात रख रहा था और पत्रकार उसे रिकॉर्ड कर रहे थे, तब मंत्री की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने पत्रकारों के कैमरे जबरन बंद कराने की कोशिश की. हद तो तब हो गई जब सुरक्षाकर्मियों ने कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों को धमकी भरे लहजे में कहा, ‘मना कर रहे हैं तो मान जाओ, वरना अच्छा नहीं होगा.’

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, डीआरडीए सभागार में ‘क्रेता-विक्रेता सम्मेलन’ का आयोजन किया गया था. इस बैठक में बाराबंकी समेत गोंडा, बहराइच, अयोध्या और अमेठी जैसे कई जिलों के आलू उत्पादक किसान, कोल्ड स्टोरेज मालिक और व्यापारी जुटे थे. मकसद था आलू के भंडारण और सही दाम पर चर्चा करना. लेकिन जैसे ही उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने विभाग की तारीफों के पुल बांधना शुरू किए, एक प्रगतिशील किसान ने उन्हें बीच में ही टोक दिया.

कोल्ड स्टोरेज मालिकों पर लगाया गंभीर आरोप
किसान ने आरोप लगाया कि कोल्ड स्टोरेज मालिक अपनी मनमानी कर रहे हैं. कई बार जब किसान आलू लेकर जाता है, तो स्टोरेज मालिक झूठ बोल देते हैं कि स्टोर फुल हो चुका है, जबकि अंदर जगह खाली रहती है. किसान ने मांग की कि कोल्ड स्टोरेज के किराए में ही पल्लेदारी (मजदूरी) का खर्च भी जोड़ा जाए और किसानों से अलग से वसूली बंद की जाए.

कैमरा देख सहमे अधिकारी, पत्रकारों से बदसलूकी
जैसे ही किसान ने अपनी बात उठाई, वहां मौजूद अधिकारियों में हड़कंप मच गया. मामले को दबाने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने मोर्चा संभाल लिया. वीडियो बना रहे पत्रकारों को धमकाया गया और उनके कैमरों पर हाथ रखकर रिकॉर्डिंग रोकने की कोशिश की गई. सत्ता की हनक और वर्दी का रौब साफ तौर पर वहां देखने को मिला, जिससे माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया.

मंत्री का आश्वासन और मालिकों की सफाई
हंगामे के बाद उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने मोर्चा संभाला और आश्वासन दिया कि पल्लेदारी के खर्च वाली मांग पर विचार किया जाएगा. उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि अगर कोई कोल्ड स्टोरेज मालिक मनमानी कर रहा है, तो उसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी. दूसरी ओर, कोल्ड स्टोरेज मालिकों का कहना था कि लगभग 85% बुकिंग एडवांस में हो चुकी है, इसीलिए नए आलू लेने में दिक्कत हो रही है.

Source

dainikupeditor@gmail.com

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