गाजीपुर: आमतौर पर जिसे सबसे कठिन विषय माना जाता है, उस फिजिक्स (भौतिक विज्ञान) से ही पूरी दुनिया चलती है. ऐसा मानना है गाजीपुर जिले के डेढ़गांव के होनहार प्रद्युम्न राय का. उन्होंने फिजिक्स जैसे जटिल विषय को न केवल सबसे दिलचस्प और प्रैक्टिकल माना, बल्कि अपने इसी नजरिए और कड़ी मेहनत के दम पर JRF परीक्षा में ऑल इंडिया 149वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन कर दिया. पारिवारिक परिस्थितियों के कारण प्रद्युम्न को पढ़ाई के साथ-साथ काम भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने मेहनत और सही रणनीति के दम पर यह उपलब्धि हासिल की.
प्रद्युम्न वर्तमान में एक निजी स्कूल में पढ़ाते हैं और साथ ही कोचिंग व ट्यूशन भी देते हैं. वह बीएससी स्तर के छात्रों को फिजिक्स पढ़ाते हैं और बताते हैं कि अगर किसी छात्र की बीएससी तक फिजिक्स की नींव मजबूत है, तो JRF जैसी परीक्षाओं की तैयारी करना आसान हो जाता है.
टाइम टेबल बनाकर की तैयारी
प्रद्युम्न बताते हैं कि उनके पास कोचिंग करने का समय नहीं था, इसलिए उन्होंने खुद से ही तैयारी की. इसके लिए उन्होंने प्रयागराज से कुछ किताबें और नोट्स जुटाए और विषयों के अनुसार अपना टाइम टेबल बनाया. उन्होंने बताया कि वे अलग-अलग टॉपिक को समय बांटकर पढ़ते थे. उदाहरण के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिज्म को उन्होंने लगभग दो महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा, जबकि क्वांटम मैकेनिक्स जैसे विषय को एक महीने में खत्म करने की योजना बनाई. वह रोजाना करीब 4 से 5 घंटे फिजिक्स विषय की तैयारी करते थे.
फिजिक्स से क्यों डरते हैं छात्र?
प्रद्युम्न का मानना है कि कई छात्र फिजिक्स से डरते हैं, लेकिन इसका असली कारण विषय नहीं, बल्कि पढ़ाने का तरीका है. वे कहते हैं, अगर छात्रों को सही शिक्षक और सही तरीके से समझाया जाए, तो फिजिक्स सबसे दिलचस्प विषय बन सकता है. पूरी दुनिया फिजिक्स के सिद्धांतों पर ही चलती है. घड़ी, पंखा, माइक, सबकुछ फिजिक्स से ही चलता है. उनके अनुसार, फिजिक्स में गणित के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से कई छात्रों को यह विषय कठिन लगने लगता है.
JRF की तैयारी के लिए सलाह
प्रद्युम्न बताते हैं कि JRF की तैयारी करने वाले छात्रों को सेक्शन A (जनरल स्टडीज) पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इसमें अपेक्षाकृत आसान प्रश्न होते हैं और अच्छे अंक मिलने की संभावना रहती है. उन्होंने सुझाव दिया कि क्वांटम मैकेनिक्स और मॉडर्न फिजिक्स से जुड़ी अच्छी किताबों को पढ़ना भी तैयारी में काफी मददगार हो सकता है.
आगे का लक्ष्य
प्रद्युम्न राय का सपना इसी क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का है. उनका मानना है कि अगर मेहनत और सही दिशा में पढ़ाई की जाए, तो किसी भी पृष्ठभूमि का छात्र बड़ी सफलता हासिल कर सकता है.










