सहारनपुर: सबको पता है प्लास्टिक हमारे जीवन में सबसे खतरनाक है लेकिन प्लास्टिक के बिना आज का जीवन अधूरा सा लगता है, क्योंकि हर चीज में प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है चाहे वह घर में रखा कोई भी समान हो प्रत्येक सामान में ज्यादा इस्तेमाल प्लास्टिक का होता है. यहां तक कि हमारे खाने की चीजों में भी प्लास्टिक का इस्तेमाल होने लगा है. अब आप सोच रहे होंगे खाने की चीजों में प्लास्टिक का इस्तेमाल कैसे होता है.
कंपनियां कर रही हैं सेहत से साथ खिलवाड़
दरअसल, जब भी आप बाहर से कुछ खरीदते हैं तो वह प्लास्टिक पैकेज में होता है लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान आपको पानी पहुंचा रहा है. पानी भी कैसे चलिए जानते हैं. जब आप कहीं सफर में जाते हैं तो आप बाहर से पानी की बोतल खरीदने हैं और आपकी कोशिश रहती है कि आप सस्ती पानी की बोतल खरीदें शायद आपको लगता है कि उस बोतल के अंदर पानी एक ही होता है लेकिन ऐसा नहीं है कुछ कंपनी है जो पानी के साथ-साथ लोगों की सेहत का ध्यान भी रख रही है, तो कुछ कंपनी बस पैसा कमाने के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रही है.
पानी की बोतल जिस केमिकल से बनाई जाती है उसको BPA बोलते हैं और वह केमिकल आपके पानी में घुल जाता है जिसको आप पी लेते हैं और वह आपके शरीर में जाकर आपके शरीर को नुकसान पहुंचता है. जिससे कई सारी बीमारियां जन्म लेती है कई कंपनियां ऐसी है जो बीपीए फ्री प्लास्टिक बोतल तैयार कर आपको अच्छा पानी भी उपलब्ध करा रही है. तो इसलिए जब भी आप सफर में है या कहीं और बैठे हैं और आपको पानी की प्यास लगी है और पानी की बोतल आपके पास है तो उस बोतल पर आप जरूर पढ़ें कि यह बोतल बीपीए फ्री है या नहीं.
साथ ही अगर ऐसा नहीं लिखा है तो उस पर कुछ कोड लिखे हैं जो कि आपको यह बताते हैं कि यह बीपीए फ्री है और इस पानी को आप पी सकते हैं यह आपको नुकसान नहीं पहुंचाएगा.
प्लास्टिक की बोतल का पानी इस तरीके से पहुंचा रहा नुकसान
आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय से बी.ए.एम.एस, एम.डी डॉक्टर हर्ष ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि प्लास्टिक की बोतल से पानी पीना सेहत के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक है और उसका रीजन यह है कि प्लास्टिक की बोतल में BPA नाम का एक केमिकल होता है जिसे हम बिस्फेनॉल ए के नाम से जानते हैं. यह जो केमिकल है यह प्लास्टिक को बनाने में सहायक होता है इसकी मदद से प्लास्टिक को बनाया जाता है और जब यह प्लास्टिक की बोतल इससे तैयार होती है और इसके अंदर जब हम पानी रखते हैं तो यह बिस्फेनॉल ए प्लास्टिक से पानी के अंदर ट्रेवल कर जाता है. जब हम पानी पीते हैं तो वह पानी के अंदर का जो बिस्फेनॉल ए है हमारी बॉडी में एंटर कर जाता है और सारे हेल्थ कंसर्न उत्पन्न करता है. तो इसीलिए मेरा तो आप सभी से यही अनुरोध है कि पानी को पीना है तो प्लास्टिक की बोतल में नहीं पीना है.
मेल इनफर्टिलिटी की समस्या होती है शुरू
पहले के लोग जब सफर करते थे तो मिट्टी के बर्तन रखते हैं या तांबे की बोतल रखते थे, वह सेहत के लिए लाभदायक होती थी. जब हम बिस्फेनॉल ए वाला पानी पीते हैं तो यह क्या करता है कि हमारी बॉडी में इस्ट्रोजन की मात्रा को बढ़ाने की कोशिश करता है जिसकी वजह से पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होना शुरू हो जाता है यानी कि मेल इनफर्टिलिटी होनी शुरू हो जाती है.
महिलाओं में भी गंभीर समस्याएं हो जाती हैं शुरू
महिलाओं में जो छोटी बच्चियों हैं उनको जल्दी मेंसेज आने शुरू हो जाते हैं अर्ली प्यूबर्टी की शिकायत होनी शुरू हो जाती है, इसके अलावा हार्ट डिसीज होने शुरू हो जाती है, कैंसर का यह कारण बनता है, यह स्किन डिजीज का कारण बनता है, बहुत सारी जायंट्स और बोर्न डिसऑर्डर्स का भी कारण बनता है, इन डाइजेशन का कारण बनता है जिनको बार-बार जो लोग प्लास्टिक की बोतल से पानी पीते हैं अक्सर पाया जाता है कि उनका पेट खराब रहता है, उनको बार-बार मोशन जाना पड़ता है तो यह डाइजेस्टिव सिस्टम को भी डिस्टर्ब करता है तो इस तरह से हेल्थ को इसके नुकसान बहुत सारे हैं.
प्लास्टिक की बोतल से पानी पीते वक्त इन कोड का रखें ध्यान
भारत में कुछ बोतल ऐसी है कुछ कंपनियां ऐसी हैं जो बीपीए फ्री प्लास्टिक बना रही है और ऐसे प्लास्टिक की बोतल का इस्तेमाल करती है जैसे कि बिसलेरी है, एक्वाफिना है यह अपनी बोतल के ऊपर स्पष्ट करके लिखते हैं बीपीए फ्री प्लास्टिक. तो आप जब पानी की बोतल खरीदने हैं तो उसके ऊपर देखिए कि वहां पर लिखा है कि नहीं लिखा है. इसके अलावा कुछ कोड होते हैं कोड 1,2,3,4,5 ये जो कोड है ये BPA फ्री प्लास्टिक के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, जबकि कोड 7 जो होता है वह BPA वाले प्लास्टिक के इस्तेमाल किया जाता है. तो आप देखिए की प्लास्टिक की बोतल के ऊपर मेंशन किया है कोड और मेंशन किया है तो कौन सा कोड है.











