निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने वाले जल्लाद किस हालत में? CM योगी से क्यों लगा रहा गुहार, जानें

Last Updated:November 09, 2025, 13:31 IST

Nirbhaya Case Wala Jallad Pawan: देश के गिने-चुने जल्लादों में से एक हैं निर्भया केस में चार दोषियों को फांसी देने वाले पवन जल्लाद. मगर, आज उन्हें अपना गुजारा करने के लिए सीएम योगी से गुहार लगाना पड़ रहा है. दरअसल, जल्लाद ने मानदेय की रकम बढ़ाने की मांग की है.

निर्भया के दोषियों को फांसी पर चढ़ाने वाले जल्लाद पवन.

मेरठ: यूपी से एक खबर सामने आ रही है. देश के गिनती के जल्लादों में से मेरठ के रहने वाले पवन जल्लाद सरकार से अपना मानदेय बढ़ाने की गुहार लगा रहे हैं. उनका कहना है कि जितना मानदेय मिल रहा है उससे गुजारा नहीं हो पा रहा है. उन्होंने इसके लिए जेल प्रशासन को पत्र लिखा है. वैसे आपको बता दें, कि पवन वही जल्लाद हैं, जिन्होंने निर्भया केस के चार दोषियों को फांसी पर लटकाया था. आइए जानते हैं पवन की जुबानी फांसी के बाद क्या किया जाता है, कितना मिल रहा मानदेय और अंतिम फांसी कब दी थी.

पवन जल्लाद ने जिला कारागार के जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा को एप्लीकेशन लिखकर मांग की है. उन्होंने कहा कि 10 हजार रुपये मिल रहे हैं. इससे गुजारा करना काफी मुश्किल हो रहा है. इसलिए सरकार से गुहार है कि मानदेय की रकम 25000 कर दें. जेल अधीक्षक ने बताया कि जेल प्रशासन ने पवन जल्लाद की गुहार शासन तक भेज दी है. अब देखने वाली बात होगी कि शासन जल्लाद के मानदेय बढ़ाने को लेकर क्या फैसला लेता है.

पवन जल्लाद ने बताया कि 20 मार्च 2020 को उन्होंने निर्भया केस के चार आरोपियों को फांसी दी थी. उसके बाद से देश में कोई फांसी नहीं हुई है. हालांकि सजा तो फांसी की सुनाई गई, लेकिन बीते 5 सालों को किसी को फांसी पर चढ़ाया नहीं गया. उन्होंने कहा कि फांसी दी जानी हो या न हो. मगर मेरठ की जेल में हाजिरी जरूर लगाते रहते हैं.

उन्होंने बताया कि फांसी के बाद क्या प्रोसेस होती है. पवन जल्लाद ने कहा कि 15 मिनट के अंदर ही फांसी दिए जाने पर शख्स ठंडा पड़ जाता है. मगर, 30 मिनट यानी आधा घंटे बाद हार्टबीट जांचने के बाद ऐलान किया जाता है कि दोषी के प्राण पखेरु हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें इंतजार रहता है कि कब उन्हें किसी अन्य दोषी को फांसी देने के लिए बुलावा मिले. वह आर्थिक रूप से बेहद परेशान है.

उन्होंने आगे कहा कि मेरठ जिला कारागार से उन्हें मात्र 10 हजार रुपए मिलते है. ये मानदेय राशि 25000 तक होनी चाहिए. वह पीएम मोदी और सीएम योगी से गुहार लगाते नजर आए. उन्होंने ‘मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया गीत…’ गीत भी सुनाया. कहा कि फांसी सबसे अच्छा विकल्प है क्योंकि दोषी तिल तिल करके मरता है. समाज में संदेश जाता है कि अगर जघन्य अपराध किया तो यही हाल होगा.

Location :

Meerut,Uttar Pradesh

First Published :

November 09, 2025, 13:31 IST

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जिसने निर्भया के दरिंदों को दी फांसी, आज खुद बदहाली में जी रहा वही जल्लाद!

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dainikupeditor@gmail.com

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