गोरखपुर: शहर की हवा अब खतरे के निशान को पार कर चुकी है. तेज़ी से चल रही विकास परियोजनाओं, बढ़ती गाड़ियों की संख्या और सड़कों पर उड़ती धूल ने गोरखपुर की फिजाओं में जहर घोल दिया है. बृहस्पतिवार को शहर का ‘एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार पहुंच गया, जो कि ‘खतरनाक स्तर माना जाता है. विशेषज्ञों ने लोगों, खासकर ‘बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को सतर्क रहने की सलाह दी है.
शहर में चल रहे बड़े निर्माण कार्य
शहर में फिलहाल कई बड़े निर्माण कार्य चल रहे हैं, जिनमें देवरिया बाईपास से टीपीनगर तक बन रहा फ्लाईओवर, और कई ‘फोरलेन सड़कों का निर्माण प्रमुख हैं. इन प्रोजेक्ट्स से लगातार उड़ती धूल और वाहनों के धुएं ने वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ा दिया है. कुछ दिन पहले हुई बारिश ने थोड़ी राहत जरूर दी थी, लेकिन ‘छठ पर्व के बाद बढ़ी गाड़ियों की आवाजाही ने स्थिति फिर से खराब कर दी.
एमएमएमयूटी (MMMUT) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में स्थापित मॉनिटरिंग सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे शहर का ‘AQI 309 तक पहुंच गया. दोपहर में यह घटकर 155 तक आया, लेकिन रात 10:30 बजे फिर से बढ़कर ‘282 दर्ज किया गया. यह स्थिति बताती है कि, हवा में मौजूद प्रदूषक लगातार लोगों की सेहत पर असर डाल रहे हैं.
लगातार बढ़ रहा प्रदूषण
पर्यावरण विशेषज्ञ का कहना है कि, गोरखपुर में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है. विशेषज्ञ ने बताया कि, एक नवंबर से AQI में बढ़ोतरी शुरू हुई थी और 3 नवंबर से यह लगातार 200 से ऊपर बना हुआ है. ठोस और तरल कणों के साथ-साथ हवा में मौजूद खतरनाक गैसें जैसे ‘कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं. ये तत्व ‘वाहनों के धुएं, सड़क निर्माण की धूल, पराली जलाने और औद्योगिक उत्सर्जन से निकलते हैं.
सर्दी के मौसम में हवा का घनत्व बढ़ने से प्रदूषक लंबे समय तक वातावरण में बने रहते हैं. इस कारण आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसी दिक्कतें आम होती जा रही हैं. विशेषज्ञों का सुझाव है कि ‘सुबह की सैर या खुले में एक्सरसाइज करने से फिलहाल बचें और जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करें.











