क्या मुमताज के पास ही दफन है शहजादे दारा शिकोह का सिर?

Last Updated:May 09, 2026, 15:26 IST

Dara Shikoh Death History: दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल अपनी खूबसूरती और मोहब्बत की मिसाल के लिए जाना जाता है, लेकिन इसी सफेद संगमरमर की दीवारों के पीछे इतिहास का एक खौफनाक और दर्दनाक अध्याय भी छिपा है. यह अध्याय है मुग़ल शहजादे दारा शिकोह की बेरहम हत्या का. कहा जाता है कि सत्ता की हनक और नफरत की आग में जल रहे औरंगजेब ने न केवल अपने भाई दारा शिकोह का कत्ल किया, बल्कि उसके कटे हुए सिर को कैद में बंद पिता शाहजहां को तोहफे के रूप में भेजा था. आज भी यह चर्चा आम है कि दारा शिकोह का सिर ताजमहल परिसर के ही किसी गुमनाम कोने में दफन है. आइए जानते हैं इतिहास के इस स्याह पन्ने की पूरी कहानी.

Dara Shikoh Death History: उत्तर प्रदेश के आगरा में कई मुगल धरोहर मौजूद हैं और ताजमहल को देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं. ताजमहल में बादशाह शाहजहां और मुमताज़ की कब्रें बनी हुई हैं. लेकिन, कहा जाता है कि दारा शिकोह की हत्या के बाद मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने उसके धड़ को दिल्ली में और सिर को आगरा के ताजमहल परिसर के किसी कोने में दफन करवाया था. ऐसा भी बताया जाता है कि सिर धड़ से अलग करने के बाद औरंगजेब ने आगरा किले में बंद अपने बेबस पिता शाहजहां को चांदी की थाली में दारा शिकोह का सिर भिजवाया था.

1659 में दारा शिकोह की हुई थी निर्मम हत्या
आगरा निवासी इतिहास के जानकार सक्षम मिश्रा लोकल 18 से बातचीत में बताते है कि दारा शिकोह की हत्या क्रूर मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने की थी. उन्होंने कहा कि सन 1659 को मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने दारा शिकोह को हराकर उनका सिर धड़ से अलग कर दिया था. बता दें कि दारा शिकोह, शाहजहां का सबसे बड़ा और सबसे चहेता बेटा था. शाहजहां के बाद दारा शिकोह ही मुग़ल साम्राज्य का असली उत्तराधिकारी था, लेकिन औरंगजेब खुद शासन करना चाहता था. यही कारण था कि उसने सत्ता के लालच में अपने ही भाई की हत्या कर दी. इतिहासकारों का मानना है कि यदि औरंगजेब युद्ध में हार जाता, तो भारत का अगला मुग़ल बादशाह दारा शिकोह होता.

औरंगजेब ने अपने भाई का सिर काटकर पिता को भिजवाया था
इतिहास की यह दास्तां औरंगजेब की क्रूरता की गवाही देती है. इतिहास के जानकार सक्षम मिश्रा बताते हैं कि औरंगजेब इतना निर्दयी था कि उसने युद्ध में जीत के बाद अपने भाई दारा शिकोह का सिर कलम कर दिया. इतना ही नहीं, सिर धड़ से अलग करने के बाद औरंगजेब ने आगरा किले में बंद अपने बेबस पिता शाहजहां को चांदी की थाली में दारा शिकोह का सिर भिजवाया था. दरअसल, औरंगजेब अपने पिता को अपनी ताकत का अहसास कराना चाहता था और यह जताना चाहता था कि अब सत्ता उसके हाथ में है. बताया जाता है कि शाहजहां अपने पुत्र दारा शिकोह से सबसे ज्यादा प्रेम करते थे और औरंगजेब इसी बात से अपने पिता से चिढ़ता था.

ताजमहल परिसर में दफन है ‘वारिस’ का सिर?
इन्हीं नफरतों और सत्ता की भूख के कारण औरंगजेब ने न केवल भाइयों का कत्ल किया, बल्कि अपने पिता शाहजहां को भी बंदी बना लिया था. लोककथाओं और कुछ ऐतिहासिक चर्चाओं में कहा जाता है कि बाद में दारा शिकोह के सिर को गुपचुप तरीके से ताजमहल के किसी कोने में दफन कर दिया गया था, जबकि उसके धड़ को दिल्ली (हुमायूं के मकबरे के पास) में दफनाया गया. हालांकि, इतिहास के जानकार यह भी स्पष्ट करते हैं कि ताजमहल में सिर के दफन होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती है और न ही इसका कोई ठोस वैज्ञानिक या पुरातात्विक प्रमाण अब तक मिल पाया है. यह आज भी इतिहास के गर्भ में छिपा एक बड़ा रहस्य बना हुआ है.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें

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