आप जानते हैं कौन-सा ‘रूह इत्र’ है सबसे महंगा, क्या है खासियत और कैसे बनता है?

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आप जानते हैं कौन-सा ‘रूह इत्र’ है सबसे महंगा, क्या है खासियत और कैसे बनता है?

Last Updated:August 11, 2025, 21:28 IST

कन्नौज, जिसे इत्र नगरी के नाम से जाना जाता है, अपनी सदियों पुरानी पारंपरिक इत्र बनाने की कला के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. यहां बनने वाला “रूह इत्र” इत्रों का बादशाह माना जाता है, जिसकी खुशबू मिट्टी की सोंधी महक और फूलों के शुद्ध अर्क से तैयार होती है. पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से बनने वाला यह इत्र न केवल महक बिखेरता है बल्कि गर्मियों में ठंडक भी देता है, और इसकी कीमत लाखों में पहुंच जाती है.

कन्नौज: इत्र नगरी कन्नौज अपनी सैकड़ों साल पुरानी इत्र बनाने की परंपरा के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन इनमें एक ऐसा इत्र है, जो खास मुकाम रखता है और जिसे इत्रों का बादशाह कहा जाता है- यह है रूह इत्र. गर्मियों में मिट्टी की सोंधी खुशबू और फूलों के शुद्ध अर्क से तैयार यह इत्र न केवल खुशबू बिखेरता है, बल्कि ठंडक भी देता है.

साधारण इत्र की तुलना में रूह इत्र की कीमत इतनी ज्यादा होती है कि सुनकर हैरानी होगी.उदाहरण के लिए, रूह गुलाब की कीमत 20 से 22 लाख रुपये तक पहुंच जाती है. कई अन्य रूह इत्र 10 से 15 लाख रुपये में बिकते हैं, और एक बेहद दुर्लभ रूह इत्र तो 50 लाख रुपये से भी ऊपर की कीमत में मिलता है.

कैसे बनता है रूह इत्र?
कन्नौज के पारंपरिक कारीगर रूह इत्र बनाने के लिए सदियों पुरानी डेग-भभका-भट्टी वाली हाइड्रो डिस्टिलेशन तकनीक का इस्तेमाल करते हैं. तांबे की डेग में फूल, पानी और खास जड़ी-बूटियां डालकर धीमी आंच पर कई घंटों तक पकाया जाता है. भाप को बांस की नलियों से एक अन्य बर्तन में ले जाया जाता है, जहां ठंडा होकर वह खुशबूदार तेल में बदल जाती है. गर्मी के मौसम में रूह खस सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, जो खस की जड़ों से तैयार होता है और इसकी महक सोंधी मिट्टी जैसी होती है. वहीं रूह गुलाब गुलाब की पंखुड़ियों से बनता है, जिसकी खुशबू नाज़ुक, मीठी और ताजगीभरी होती है.

कीमत और खासियत
रूह इत्र पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से, बिना किसी केमिकल के तैयार किया जाता है, इसलिए इसकी कीमत साधारण इत्रों से कहीं ज्यादा होती है. यही कारण है कि इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारी मांग रहती है.

क्या कहते हैं इत्र व्यापारी?
इत्र व्यापारी निशीष तिवारी बताते हैं कि कन्नौज के कारीगर पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस कला को संजोए हुए हैं. रूह इत्र सिर्फ खुशबू नहीं, बल्कि कन्नौज की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है. यहां बनने वाले हर इत्र की अपनी अलग पहचान और खासियत है.

Location :

Kannauj,Uttar Pradesh

First Published :

August 11, 2025, 21:28 IST

Source

dainikupeditor@gmail.com

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